कलेक्ट्रेट में कोरोना को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करते डीएम चंद्र भूषण सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के आवास के 200 मीटर दायरे में रहने वाले लोगों की कोरोना जांच अनिवार्य होने के बाद जिला प्रशासन ने गूगल मैप को हथियार बनाया है। अब गूगल मैप से संक्रमित मरीज के आवास के आसपास का 200 मीटर दायरा और उसमें कितने घर हैं यह तय किया जाएगा। जिला कोरोना कंट्रोल रूम से इस मैपिंग को अंजाम दिया जाएगा। डीएम ने सीएमओ को कोरोना कंट्रोल रूम प्रभारी से समन्वय स्थापित करते हुए इस काम को अंजाम देने का निर्देश दिया है।
कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने फिर से पुरानी व्यवस्था के तहत संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले व आसपास रहने वाले व्यक्तियों की जांच का निर्णय लिया है। इसके तहत कोरोना संक्रमित मरीज अगर किसी बंद मोहल्ले या कॉलोनी, बस्ती में रहता है तो उसके पूरे परिवार सहित मोहल्ले वालों की भी जांच होगी। वहीं, सड़क किनारे बने घरों में रहने वाले मरीजों के घर के 200 मीटर दायरे में कोरोना जांच की जाएगी। इस 200 मीटर के दायरे को गूगल मैपिंग के जरिये कोरोना कंट्रोल रूम से निर्धारित किया जाएगा। डीएम के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीज से ज्यादा समाज को उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति से होता है। संक्रमित को तो कोविड अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है। मगर, संपर्क वाला व्यक्ति कोरोना वाहक साबित होता है। इसलिए जिला प्रशासन ने तय किया है कि मरीज के संपर्क वालों की जांच कराना अति आवश्यक है।
तत्काल निगरानी समिति को करें सक्रिय
डीएम ने सभी एसडीएम व एमओआईसी को निर्देश दिए कि वे तत्काल निगरानी समिति को सक्रिय करें तथा निगरानी समिति के सदस्य गांव में बाहर से आने वाले व्यक्ति की सूचना कोरोना कंट्रोल के नंबर 05712420100, 05712420101 पर जरूर दें। डीएम ने आदेश दिए कि सैंपलिंग के दौरान लक्षण सहित/लक्षण रहित/अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों की आवश्यक रूप से सूचना अंकित की जाए और उनकी जांच कराई जाए।