अलीगढ़ में कोरोना वायरस का संक्रमण जिस तरह फैल रहा है उसे देखते हुए अब जिला प्रशासन के स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में यह तय किया गया है कि अब पोस्टमार्टम केंद्र पर आने वाले हर शव का पहले कोरोना परीक्षण कराया जाएगा, उसके बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया होगी और परिवार को सौंपे जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
इसी तरह जेल जाने वाले हर अपराधी का भी पहले कोरोना परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद ही उसे अंदर भेजा जाएगा। कोरोना महामारी के फैलने और लॉकडाउन लागू होने के बाद अब तक ऐसी व्यवस्था थी कि जिन मामलों में जरूरत महसूस की जा रही थी उसी में पोस्टमार्टम केंद्र पर आने वाले शवों का या जेल भेजे जाने वाले अपराधियों का कोरोना परीक्षण कराया जा रहा था।
अब तक दो शवों का और एक अपराधी का परीक्षण कराया जा चुका है, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। मगर, अब जिस तरह से यह वायरस फैल रहा है, उसे ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि पोस्टमार्टम केंद्र पर आने वाले प्रत्येक शव का पहले परीक्षण कराया जाएगा।
इस दौरान रिपोर्ट आने में दो से ढाई दिन लग सकते हैं। तब तक इन शवों को पोस्टमार्टम केंद्र या जेएन मेडिकल कॉलेज के ही डीप फ्रीजर में संरक्षित रखा जाएगा। इसी तरह जिस अपराधी को गिरफ्तारी के बाद जेल भेजना होगा, उसका भी पहले परीक्षण कराया जाएगा।
रिपोर्ट आने तक उसे थाने के हवालात में रखा जाएगा। इसके बाद ही उसे रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। दोनों मामलों में यह भी तय किया गया है कि अगर शव की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसे कोरोना प्रोटोकाल के तहत ही परिवार को सौंपा जाएगा। अपराधी अगर पॉजिटिव आता है तो उसे जेल के बजाय अस्पताल भेजा जाएगा।