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कोरोना का असर..1.55 लाख मुकदमों में टल रही सुनवाई

Wed, 26 May 2021 12:52 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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जिला न्यायालय। - फोटो : Rupesh
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कोरोना के खौफ का हर तरफ असर है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट के निर्देश पर दीवानी न्यायालय में कामकाज करीब एक महीने से बंद है। सिर्फ जमानतों और जरूरी रुटीन वर्कों को निपटाने के लिए चार न्यायालयों में वर्चुअल सुनवाई हो रही है। इस तरह आंकड़ों पर गौर करें तो दीवानी में लंबित 1.55 लाख मुकदमों में सुनवाई लगातार टल रही है। इस वजह से पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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दीवानी न्यायालय में हाईकोर्ट के निर्देश और जिला जज विवेक संगल के निर्देशन में एडीजे-14 नजारत प्रभारी अभय प्रताप सिंह द्वारा वर्चुअल सुनवाई संचालित कराई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत 2 एसीजेएम और दो एडीजे स्तर के न्यायिक अधिकारी हर दिन वर्चुअल सुनवाई के लिए जिला जज द्वारा नियत किए जाते हैं।


ये न्यायिक अधिकारी जमानत, पुलिस रिमांड, रुटीन के जरूरी आवेदन, धारा 164 के बयान, 82/83 आदेश, गाड़ी रिलीज आदि आवेदनों की वर्चुअल सुनवाई करते हैं। बाकी मुकदमों में ट्रायल, साक्ष्य पेशी या गवाही पेशी के लिए लगातार तारीखें नियत कर दी जा रही हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व सचिव योगेश सारस्वत कहते हैं कि हाईकोर्ट के निर्देश पर दीवानी में मुकदमों के ट्रायल नहीं हो रहे, यह अधिवक्ता हित में लिया गया निर्णय है। जेलों से बंदी भी नहीं आ पा रहे थे, इसलिए मुकदमों के ट्रायल नहीं हो पा रहे थे।
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20 से अधिक अधिवक्ताओं का देहांत हुआ
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ठा. ब्रजेश सिंह व सचिव संजय पाठक के अनुसार अब तक 20 से अधिक अधिवक्ताओं का देहांत हुआ है। नियमानुसार जिस अधिवक्ता की मौत होती है, उनके परिवार को दो लाख रुपये बार एसोसिएशन द्वारा दिए जाते हैं। बाकी 70 साल से कम उम्र वाले अधिवक्ता के निधन पर बार काउंसिल द्वारा 5 लाख रुपये परिवार को दिए जाते हैं। हमारे स्तर से यह सहायता राशि लगातार दी जा रही है। बाकी किसी अन्य तरह की मदद की सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। 

लगातार रिहा किए जा रहे बंदी
बार अध्यक्ष ठा. ब्रजेश सिंह के अनुसार दीवानी में जमानत व जरूरी रुटीन काम वर्चुअल कराए जा रहे हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 7 साल से कम सजा वाले बंदियों को जिला जज के निर्देशन में लगातार रिहा किया जा रहा है।

ये हैं मुकदमों के आंकड़े
-90000 मुकदमे फौजदारी के लंबित
-25000 मुकदमे सिविल प्रकरण के
-25000 मुकदमे एनआई एक्ट के हैं
-10000 मुकदमे पारिवारिक वाद के

न्यायालयों का संचालन
-जिला जज के अलावा 17 एडीजे, 4 परिवार न्यायालय, 4 पॉक्सो न्यायालय, 2 फास्ट्र ट्रैक न्यायालय, सत्र न्यायालय स्तर पर हैं। निचले स्तर पर सीजेएम के अलावा 6 एसीजेएम, 4 जेएम व 3 तहसील मुख्यालयों पर आउट लाइन कोर्ट हैं। इसके अलावा सिविल मामलों के लिए जेएससीसी, अपर जेएससीसी, सिविल जज, 4 अन्य सिविल न्यायालय, जूनियर सिविल जज, 2 अन्य जूनियर सिविल न्यायालय, 2 फास्ट्रट्रैक सिविल न्यायालय संचालित हैं।
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इन महत्वपूर्ण प्रकरणों में सुनवाई टली
-टप्पल में मासूम बच्ची की हत्या का प्रकरण
-इगलास के फर्नेश कारोबारी का अपहरण कांड
-बाबरी मंडी कांड में हत्या के मामले में सुनवाई
-रेलवे रोड पर दोहरे हत्याकांड का ट्रायल भी
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