त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना निपट गई। अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए गांव-गांव में कोरोना मरीजों की तलाशना बड़ी चुनौती बनेगा। स्वास्थ्य विभाग पांच मई से पांच दिन तक गांव-गांव में एलटी टीमों को लगाकर कोरोना की जांच कराएगा। इसके लिए निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है।
इस समिति में आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम चौकीदार, कोटेदार शामिल रहेंगे। घर-घर जाकर कोरोना वायरस से होने वाली खांसी, जुकाम, बुखार जैसे लक्षण वाले मरीजों की तलाश करेंगे और उनकी जांच कराएंगे। इधर, प्रशासन के सामने दूसरी चुनौती ये होगी कि गंभीर बीमार/संक्रमित मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ सकता है, जबकि अस्पतालों में बेड की संख्या में पहले से ही कमी चल रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ी थीं। समझाने के बाद भी प्रत्याशियों व उनके समर्थकों ने भारी संख्या में एकत्रित होकर प्रचार-प्रसार किया। इसके बाद मतदान और मतगणना वाले दिन सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ीं। इस पर अधिकारियों ने भी माना है कि अब गांव में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से असर दिखाएगी।
इसके बाद शासन स्तर से पांच दिवसीय जांच अभियान चलाने का आदेश हुआ है। प्रभारी जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि गांव-गांव कोविड जांच अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा। निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है। साथ ही अन्य प्लान भी तैयार किए जा रहे हैं। अस्पतालों में भी बेड्स की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर है।