फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: सिगरेट पर 20 रुपये ज्यादा लेना पड़ा भारी, दुकानदार और कंपनी को देने होंगे 10 लाख

Tue, 16 Jun 2026 12:34 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी दुकानदार कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकपक्षीय  कार्यवाही की गई। वहीं, सिगरेट निर्माता कंपनी आईटीसी  ने अपना बचाव करते हुए दलील दी कि उनका इस दुकानदार पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है और न ही उसने इस दुकानदार को अपना अधिकृत वेंडर नियुक्त किया है।
विज्ञापन
सिगरेट - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सिगरेट के पैकेट पर छपे प्रिंट रेट से ज़्यादा पैसे वसूलने वाले एक दुकानदार और सिगरेट निर्माता कंपनी को उपभोक्ता कोर्ट ने कड़ा सबक सिखाया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अलीगढ़ ने उपभोक्ता से मात्र 20 रुपये अतिरिक्त वसूलने के एक मामले में सिगरेट बनाने वाली मशहूर कंपनी आईटीसी  और स्थानीय दुकानदार पर संयुक्त रूप से 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही पीड़ित ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के एवज में मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया गया है।  

विज्ञापन


मामला अलीगढ़ के बन्ना देवी क्षेत्र का है। रघुवीरपुरी के रहने वाले देवेश गौतम ने 29 जनवरी को जिला उपभोक्ता आयोग के सामने स्थित एक दुकानदार हीरा लाल वार्ष्णेय से 'क्लासिक' ब्रांड सिगरेट का एक पैकेट खरीदा था। सिगरेट के पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य 340 रुपये अंकित था, लेकिन दुकानदार ने इसके लिए 360 रुपये की मांग की।  

ग्राहक देवेश ने जब इस ओवररेटिंग का विरोध किया, तो दुकानदार नहीं माना। आखिरकार देवेश को मजबूरन 360 रुपए का भुगतान ऑनलाइन  ट्रांजैक्शन के जरिए करना पड़ा। इसके बाद पीड़ित ने सबूतों के साथ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा दी।  

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट में कंपनियों और दुकानदार का रुख

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी दुकानदार कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकपक्षीय  कार्यवाही की गई। वहीं, सिगरेट निर्माता कंपनी आईटीसी  ने अपना बचाव करते हुए दलील दी कि उनका इस दुकानदार पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है और न ही उसने इस दुकानदार को अपना अधिकृत वेंडर नियुक्त किया है। कंपनी ने यह भी कहा कि वे किसी भी तरह की कालाबाजारी या अनुचित व्यापार व्यवहार में शामिल नहीं हैं।  

आयोग की पीठ के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य  पूर्णिमा सिंह राजपूत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि दुकानदार, निर्माता कंपनी के प्रॉडक्ट को ही बेच रहा था, इसलिए वह कंपनी का सब-एजेंट माना जाएगा और कंपनी अपने उत्पाद की बिक्री में हो रही कालाबाजारी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।  

उपभोक्ता फोरम ने अपने आदेश  जारी किए कि अनुचित व्यापार व्यवहार और आम जनता से छिपी लूट के खिलाफ कोर्ट ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 39(1)(के) के तहत दोनों विपक्षी गणों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराया जाएगा।  

कोर्ट ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को उससे वसूले गए अतिरिक्त 20 रुपये 18% वार्षिक ब्याज के साथ वापस किए जाएं। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा और अदालती खर्च के रूप में 5,000 रुपये अलग से दिए जाएं। आयोग ने दोनों विपक्षी पक्षों को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि तय समय में आदेश का पालन नहीं किया गया, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्यवाही (सजा) की जाएगी।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें