आशीष निगम, अलीगढ़।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा में अब नई मांग जोर पकड़ गई है, वो ये कि इस संवैधानिक पद पर किसी जाट महिला को बैठाया जाए। जिससे इस समुदाय में पार्टी की पकड़ मजबूत बनी रह सके। ये मांग उस वक्त उठ रही है, जब जिले के जाट बहुल इगलास, अतरौली, खैर और टप्पल में पार्टी के जिपं सदस्य प्रत्याशी बुरी तरह से हारे हैं। इस माहौल में आगामी विधानसभा चुनावों तक जाटों की ऐसी नाराजगी झेलना पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगा।
जाटों की नाराजगी की अहम वजह यह है कि वर्तमान में अलीगढ़ में पार्टी के तीन सांसद, नौ विधायक और एक निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, लेकिन इनमें से कोई भी जाट नहीं है। दूसरा किसान आंदोलन के दौरान से ही जाट भाजपा से नाराज हैं।
ऐसे में जाटों की मांग है कि कम से कम एक संवैधानिक पद उनके पास हो। इस मांग से एटा सांसद राजवीर सिंह ‘राजू’ की समधन विजय सिंह (क्षत्रिय समुदाय से) की अध्यक्ष पद की दावेदारी पर संकट आ रहा है। ऐसे में पार्टी के रणनीतिकारों के सामने चौधरी या समधन का सवाल खड़ा हो गया है।
संवैधानिक पदों के अनुसार, पार्टी के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो वर्तमान में सर्वाधिक पांच पद क्षत्रिय समुदाय के पास हैं, जिसमें एमएलसी ठा. जयवीर सिंह, स्नातक एमएलसी ठा. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह, छर्रा विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह, दर्जा प्राप्त मंत्री ठा. रघुराज सिंह और निवर्तमान जिपं अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू शामिल हैं।
ब्राह्मण समुदाय से अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम, कोल विधायक अनिल पाराशर हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग में लोधी समाज से एटा सांसद राजवीर सिंह राजू, प्रदेश के राज्यमंत्री संदीप सिंह आते हैं। शहर विधायक संजीव राजा वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अनुसूचित जनजाति से हाथरस सांसद राजवीर सिंह दिलेर, इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी और खैर विधायक अनूप प्रधान हैं। इनमें से एक भी जाट नहीं है। ऐसे में जाटों का सवाल है कि जब पहले से ही पांच पद क्षत्रिय समुदाय के पास है तो छठवां भी उनको क्यों दिया जा रहा है?
ऐसा नहीं है कि पार्टी ने जाटों को बिल्कुल तरजीह नहीं दी है। वर्तमान में महिला आयोग की सदस्य मीना कुमारी, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य चौ. नत्थी सिंह, कोआपरेटिव बैंक की चेयरमैन उमेश कुमारी और पार्टी के जिलाध्यक्ष चौ. ऋ षिपाल सिंह जाट समुदाय से हैं।
इसके बाद भी जाटों की मांग है कि कम से कम एक संवैधानिक पद उनके पास भी हो। ऐसे में पार्टी विचार मंथन में जुटी है कि इस मांग का भी सम्मान हो और विजय सिंह का भी मान रखा जा सके, क्योंकि विजय सिंह एटा सांसद राजू भैया की समधन हैं और अध्यक्ष पद की दावेदार भी हैं। अब नतीजा क्या होगा? ये जल्द ही सामने आएगा।
अंजू देवी पर पार्टी खेल सकती है दांव
दिलचस्प बात ये भी है पार्टी के विजयी नौ जिला पंचायत सदस्यों में से केवल कृष्णपाल लाला जाट समुदाय हैं, जिन्होंने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह को वार्ड 19 से हराया है। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला है। ऐसे में कृष्णपाल को अध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता है।
अब पार्टी किसी ऐसी विजयी जाट महिला की तलाश में है, प्रतिष्ठित हो। इस क्रम में पार्टी से बागी होकर चंडौस के वार्ड नंबर-15 से चुनाव लड़ी रिंकी चौधरी हैं, लेकिन उनको लेकर पार्टी बहुत गंभीर नहीं। बताया जा रहा कि उनके परिजन कई मुकदमों में फंसे हैं। रालोद और सपा में जीती एक-एक महिला जाट प्रत्याशी भाजपा के साथ आसानी से नहीं आएंगे।
अब विकल्प में दो निर्दलीय और हैं। जिसमें टप्पल के वार्ड नंबर-16 से लगातार दूसरी बार विजयी अंजू देवी (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह की पत्नी) और गोंडा के वार्ड नंबर 26 से ममता चौधरी हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी अंजू देवी को लेकर विचार कर सकती है, क्योंकि सुधीर सिंह के परिजन पूर्व में आरएसएस से जुड़े रहे हैं।
साथ ही अंजू देवी के साथ लगभग आधा दर्जन निर्दलीयों का समर्थन भी है, जिससे भाजपा को बहुमत साबित करने में आसानी होगी। क्योंकि पार्टी के नौ, छह बागी और अंजू पक्ष के छह सदस्य मिलाकर पार्टी 21 तक पहुंच सकती है, उसके बाद केवल चार अन्य का समर्थन जुटाना होगा।