रालोद विधान मंडल दल के नेता और बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह ने कहा है कि रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह के प्रयासों से प्रदेश में जल्द ही सपा, कांग्रेस और रालोद के बीच गठबंधन होगा। कुछ सीटों पर बात हो रही है, जल्द ही सीटों का बंटवारा फाइनल होते ही ये काम पूरा हो जाएगा।
इसके बाद प्रदेश में इसी गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है। बरौली विधायक ने कहा है कि चौ. अजित सिंह कई महीने से इसकी पहल कर रहे हैं। उन्होंने सबको एक मंच खड़ा भी किया था, जिसके बाद कुछ दिनों तक इसकी पहल आगे नहीं बढ़ पाई। अब कांग्रेस, सपा की सहमति के बाद ये प्रयास रंग लाने जा रहा है।
अब दिल्ली में तीनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली वार्ताओं में इस पर मुहर लगनी बाकी है। ये बात बड़े स्तर पर बात हो रही है, जिसमें कांग्रेस और सपा से सीएम अखिलेश यादव के करीबी बड़े कद्दावर नेता पहल क र रहे हैं। इससे पहले विधानसभा सत्र के दौरान सीएम से भी इस बारे में वो खुद भी बात कर चुके हैं।
लेकिन वर्तमान में सपा में अंदरूनी समस्याओं के कारण दो दिन से इस मुद्दे पर सीएम अखिलेश यादव से सीधे बात नहीं हुई है, जिससे थोड़ा सा ब्रेक लग गया है। पूरी उम्मीद है कि गठबंधन होगा। सबकी सहमति जल्द ही हो जाएगी। रालोद के वर्तमान में आठ विधायक हैं, जिसमें सर्वाधिक तीन विधायक अलीगढ़ से हैं।
ठा. दलवीर सिंह ने कहा कि विधानमंडल दल का नेता होने के नाते रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह से रोज बात हो रही है, वो चुनाव से पहले की तैयारियों पर पूरी समीक्षा करते फीडबैक ले रहे हैं। अलीगढ़ में रालोद फिर विजय पताका फहराएगा।
गठबंधन का गणित
1 : सपा में सीटों के बंटवारे को लेकर मचे घमासान के बाद कांग्रेस की ओर से यूपी में सीएम पद की दावेदार दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने यूपी के सीएम और वर्तमान में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही थी। ये समर्थन उन्होंने वर्तमान विधानसभा में अखिलेश यादव के शक्ति परीक्षण के लिए भी दिया था, लेकिन इसकी नौबत आने से पहले ही यूपी में चुनाव का ऐलान हो गया।
2 : सीएम अखिलेश यादव की उम्मीदवारों की सूची में अलीगढ़ से केवल तीन सपा विधायकों को ही दोबारा उम्मीदवार बनाया गया, जिसमें शहर से जफर आलम, अतरौली से वीरेश यादव और छर्रा से ठा. राकेश सिंह शामिल थे। बाकी चार सीटों पर सीएम ने कोई प्रत्याशी नहीं बनाया था। इसकी वजह संभावित गठबंधन को माना गया। क्योंकि कांग्रेस, सपा व रालोद गठबंधन की सूरत में अलीगढ़ में कोल से कांग्रेस और इगलास, बरौली व खैर से वर्तमान रालोद विधायकों को मौका देने की बात तय मानी जा रही है।
3 : कांग्रेस, सपा व रालोद गठबंधन का ऐलान दिल्ली या लखनऊ में भले ही हो, लेकिन इसका बड़ा असर अलीगढ़ में होगा क्योंकि अलीगढ़ में वर्तमान में सपा के चार और रालोद के तीन विधायक हैं। पूरे प्रदेश में अलीगढ़ ही एक ऐसा जिला है, जहां रालोद के तीन विधायक हैं। इसके बाद मथुरा में दो विधायक हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर कोल विधानसभा पर अपने उम्मीदवार का समझौता नहीं करेगी, क्योंकि विस चुनाव 2012 में कांग्रेस उम्मीदवार विवेक बंसल महज 750 वोटों से हार गए थे और सपा के जमीरउल्लाह विधायक बने थे।