वर्ष 2018 में हुए अलीगढ़ फर्जी बस टिकट मामले के बाद फिर से परिवहन निगम सुर्खियों में है। रोडवेज बसों के परिचालक मैजिक पेन से टिकट या वेबिल (यात्री टिकट का ब्योरा लिखने वाली शीट) बना रहे थे। ड्यूटी खत्म होने के बाद वेबिल पर अन्य पेन से टिकट बिक्री का मनमाफिक आंकड़ा भर देते थे। शिकायत पर यह खेल अल्ट्रा वायलेट (परा बैंगनी) लाइट में पकड़ में आया तो विभाग में हड़कंप मच गया। लखनऊ मुख्यालय की टीम के साथ स्थानीय टीम ने अलीगढ़ मंडल के अलीगढ़, हाथरस, कासगंज व एटा डिपो में जांच शुरू कर दी है। सभी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया है। विभागीय कार्रवाई शुरू होने के बाद चालक-परिचालकों में हड़कंप की स्थिति है।
प्रकरण के अनुसार, यातायात निरीक्षक (टीआई) ने मैजिक पेन से मैनुअल टिकट बनाने और वेबिल पर मनमाने आंकड़े भरने की शिकायत लखनऊ मुख्यालय से की थी। मुख्यालय ने इस मामले की पड़ताल कराई तो अलीगढ़, गाजियाबाद व लखनऊ क्षेत्र में एक-एक प्रकरण सामने आया, जिसमें परिचालक ईटीएम होने के बावजूद मैनुअल टिकट बना रहे थे। वेबिल पर मैजिक पेन से मार्ग परिचालन भरा गया था। ड्यूटी खत्म होने के बाद परिचालक वेबिल पर टिकट बिक्री के मनमाफिक आंकड़े लिख देते थे और उसी केे अनुसार रुपये जमा कराते थे। जानकारों के मुताबिक, मैजिक पेन के लेखन की प्रकृति ऐसी होती है कि लेखनी बल्ब, सूर्य की रोशनी अथवा हीटर, आग की तपिश में विलुप्त हो जाती है, लेकिन यह लेखनी अल्ट्रा वायलेट (यूवी) रोशनी में साफ दिख जाती है। उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के अपर प्रबंधक निदेशक सरनीत कौर ब्रोका के निर्देश पर अलीगढ़ मंडल के सभी डिपो में जांच जारी है।
जांच के लिए भेजे गए यूवी लाइट उपकरण
- मैजिक पेन की लेखनी सिर्फ यूवी लाइट में ही दिखती है। इसीलिए चारों जनपदों (अलीगढ़, हाथरस, एटा व कासगंज) के डिपो में यूवी लाइट उपकरण पहुंचाए गए हैं। इसके अलावा संबंधित कागजातों को स्ट्रांग रूम में रखवा दिया गया है।
चार-पांच परिचालक सामने आने की है उम्मीद
- प्रारंभिक जांच में अभी तक चार-पांच परिचालकों के कागजात यूवी लाइट में गड़बड़ मिले हैं। इनकी गहनता से जांच की जा रही। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
2018 में 14 अफसर हुए थे निलंबित
- 2018 में अलीगढ़ फर्जी बस टिकट मामले में 65 कर्मचारी-अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। उस समय 14 अफसरों को निलंबित किया गया था। जबकि 51 संविदा चालक-परिचालकों को बर्खास्त किया गया था। इस प्रकरण में अलीगढ़ व आगरा के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक भी शामिल थे। अलीगढ़ के क्षेत्रीय प्रबंधक रहे अतुल त्रिपाठी निलंबित किए गए थे। इस मामले का खुलासा एसटीएफ ने किया था। हाथरस, मथुरा, सादाबाद रूट पर फर्जी टिकट बनाकर यात्रियों से किराया वसूला जाता था।
यात्रियों ने चुकाई पूरी रकम
- यात्रा के दौरान मैजिक पेन से परिचालक भले ही टिकट या वेबिल में खेल करते हों, लेकिन यात्रियों से पूरी रकम वसूली जाती थी। आशंका जताई जा रही है कि यात्रियों को जो टिकट देते थे, उनके ऊपर से भी स्याही उड़ गई होगी। अगर कोई टिकट मिलेगा तो यूवी लाइट में ही आंकड़ा दिख सकता है। यात्रियों के साथ परिवहन निगम को धोखा देकर राजस्व को चूना लगाया गया है।
लखनऊ से आई टीम के साथ अलीगढ़ मंडल में मैजिक पेन प्रकरण की जांच चल रही है। सभी डिपो में यूवी लाइट के उपकरण पहुंचा दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दोष सिद्ध होते ही तत्काल संविदा समाप्त होगी। मुकदमा दर्ज करवाकर जेल भिजवाएंगे।
-मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक।
ईटीएम होने के बाद भी हस्तलिखित टिकट बना रहे थे
अलीगढ़। मैजिक पेन प्रकरण में यह सवाल भी उठ रहा है कि सभी परिचालकों के पास ईटीएम हैं, फिर क्यों हस्तलिखित टिकट बनाया जा रहा था। दरअसल, परिचालक ईटीएम को खराब बताकर हस्तलिखित काटते रहते हैं। विभिन्न पहलुओं पर जांच पूरी होने के बाद ही हकीकत सामने आने की बात कही जा रही है।