100 बेड की क्षमता वाले दीनदयाल संयुक्त अस्पताल को यदा कदा मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिलाने का प्रयास होता है। ये हालात तब हैं कि 15 वेंटिलेटर का आईसीयू संचालन जैसे तैसे किया जा रहा है। कोविड के दौर में इस अस्पताल में 40 वेंटिलेटर बेड सहित 100 बेड का आईसीयू संचालित किया गया। उस समय जिले भर के डॉक्टर यहां लगा दिए गए। मगर सभी डॉक्टर वापस कर दिए गए। फिर इसके संचालन पर संकट शुरू हुआ। बाद में जैसे-तैसे व्यवस्था कर आईसीयू का संचालन किया जा रहा है, जिसमें 15 वेंटिलेटर के सहारे 23 बेड का आईसीयू-एचडीयू संचालित किया जा रहा है। जिसमें न्यूरो, नेफ्रो, हृदय से संबंधित किसी गंभीर मरीज को भर्ती करने या ऑपरेशन करने की सुविधा नहीं है। न बेड डायलिसिस हो सकती है। सिर्फ सामान्य इमरजेंसी, सीओपीडी, सामान्य हेड इंजरी के मरीजों को आईसीयू या वेंटिलेटर सुविधा मिल सकती है। इसी तरह पीकू वार्ड संचालित नहीं है। ओटी व पीकू की कई मशीनें भी धूल फांक रही हैं।
जिला अस्पताल : कब चलेगा पीकू वार्ड पता नहीं
मलखान सिंह जिला अस्पताल में 10 वेंटिलेटर युक्त बेड वाले पीकू वार्ड पर ताला लगा है। यह वार्ड दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो गया। सामान भी रखवा दिया गया लेकिन वार्ड पर ताला लगा हुआ है। अब यह कब चलेगा इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि अधिकारी कहते हैं कि स्टाफ व चिकित्सक आने पर ही इसे शुरू किया जाएगा। सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह वर्मा कहते हैं कि वे लगातार शासन के संपर्क में हैं। पीकू वार्ड के लिए चिकित्सक व स्टाफ नहीं मिल पा रहा। इसलिए उसका सामान सुरक्षित रखा हुआ है।