32 बार खिंचवाए फोटो, नहीं मिला मकान
सीसई के 62 वर्षीय रघुवीर ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कम से कम 32 बार उनका फोटो लिया गया। कभी इधर तो कभी उधर से उनके घर और परिवार के फोटो खींचे गए, लेकिन अब तक मकान नहीं मिला। कई बार जिला मुख्यालय जाकर इसका जवाब भी लेने की कोशिश की, लेकिन किसी ने कोई सहायता नहीं की। आखिर में उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि सीसई की किस्मत नहीं बदलेगी।
कागज गए, सिलिंडर नहीं आया
रघुवीर की तरह गांव की 66 वर्षीय देवकी ने कहा कि साल भर पहले एक शिविर लगा, जिसमें उन्होंने अपने कागज दिए लेकिन आज तक उन्हें न पेंशन मिली और न मुफ्त सिलेंडर। देवकी के पास खड़ी 24 वर्षीय संतोषी ने बताया कि उनकी मां को भी कभी पेंशन नहीं मिली। उन्होंने खुद कई बार ऑनलाइन आवेदन किया, फिर भी लाभ नहीं मिला।
बुखार में भी अतरौली का सहारा
ग्रामीण सोरन सिंह कहते हैं कि गांव में अस्पताल नहीं है। बच्चे को बुखार तक आ जाए तो अतरौली लेकर जाना पड़ता है। रोडवेज बस स्टैंड नहीं होने से आपात स्थिति में वाहन किराए पर लेना पड़ता है। गर्भवती महिला की मासिक जांच तो दूर प्रसव के लिए अस्पताल ले जाने के लिए गांव वाले अपने साधन लेकर जाते हैं। उन्होंने छह ऐसे मामले गिनाए जिनमें देरी के चलते घर में ही प्रसव हो गया।
वोट के बाद गांव की जरूरत नहीं
ग्रामीण डालचंद्र ने बताया कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद गांव का रुख नहीं करते। पिछली बार सांसद सतीश गौतम के लिए उनके बेटे यहां प्रचार के लिए आए, लेकिन जीतने के बाद कोई प्रतिनिधि गांव लौटकर नहीं आया। इसी तरह यहां के स्थानीय विधायक संदीप सिंह प्रदेश में शिक्षा राज्य मंत्री हैं। उनके दादा कल्याण सिंह और पिता पूर्व सांसद राजवीर सिंह हैं। डालचंद्र के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के समय गांव में कई बार शिविर लगते थे, लेकिन अब उनके परिवार से वहां कोई नहीं आता।