रामघाट रोड को जीटी रोड से जोड़ने वाले क्वार्सी से बौनेर लिंक मार्ग का निर्माण विभागों के बीच में फंस कर रह गया है। इसके लिए दो साल से पत्राचार हो रहे हैं। अब आकर सिंचाई विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए कुछ शर्तेँ रख दी हैं। जिनमें कहा है कि पीडब्ल्यूडी सड़क बना सकता है लेकिन मालिकाना हक सिंचाई विभाग का ही रहेगा। सड़क निर्माण के दौरान ड्रेन (माइनर) के सेक्शन से किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए।
क्वार्सी और एटा चुंगी चौराहे के जाम के बोझ को कम करने के लिए इस रोड का प्रयोग आपात काल में किया जाता है। हालत इतनी खराब है कि इस पर वाहन लेकर चलना मुश्किल होता है। अगर इसका निर्माण हो जाए तो स्थायी बाईपास बनाया जा सकता है। इसको लेकर अमर उजाला द्वारा मुद्दा उठाया जा रहा है। इस विषय में कमिशभनर गौरव दयाल के स्तर से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को लिखा गया, जिस पर पीडब्ल्यूडी सड़क निर्माण के लिए तैयार है और इसकी कार्ययोजना बना ली गई है। यह सड़क जोफरी ड्रेन की पटरी पर है। इसलिए सिंचाई विभाग की अनुमति और अनापत्ति लेना जरूरी है। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी स्तर से सिंचाई विभाग से अनापत्ति मांगी है। इस बारे में सिंचाई विभाग से शासन ने स्थलीय रिपोर्ट मांगी गई। मुख्य अभियंता गंगा, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग मेरठ की ओर से एक पत्र इसी साल 25 अप्रैल को शासन में भेजा गया है, जिसमें एनओसी जारी करने से पहले कुछ शर्तें रखी हैं।
पहले सिंचाई विभाग ने सड़क हस्तांतरण पर मांगे थे 249 करोड़ रुपयेे
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव ने 26 अगस्त 2020 को अलीगढ़ में इस रोड का निरीक्षण किया था। इस दौरान निरीक्षण के समय सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली इस सड़क को पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद एडीए की तीन सितंबर 2020 को हुई बोर्ड बैठक में सड़क हस्तांतरण की बात उठी। इस पर सिंचाई विभाग ने 26 सितंबर 2020 को भेजे एक प्रपत्र में कहा कि 9.9011 हेक्टेयर भूमि की इस सड़क की कीमत सर्किल रेट के अनुसार 124 करोड़ 86 लाख 18 हजार 195 रुपये है। यह भूमि शहरी आबादी में है। इसलिए सिंचाई विभाग को इसकी दोगुनी कीमत 249 करोड़ 72 लाख 37 हजार 195 रुपये देने होंगे। जिसकी शासन से अनुमति मिलने पर हस्तांतरित कराया जा सकेगा। सिंचाई विभाग द्वारा यह रकम ेबताए जाने पर पीडब्ल्यूडी ने स्वामित्व हस्तांतरण की बात छोड़ सिर्फ निर्माण के लिए अनापत्ति मांगना शुरू कर दिया। उसी के बाद मंडलायुक्त स्तर से एनओसी के लिए शासन में पत्राचार किया गया।
ये लगाई गई हैं शर्तें
शासन को भेजे पत्र में पांच बिंदुओं की शर्त रखी गईं हैं, जिनमें सबसे पहले कि भविष्य में कभी भी ड्रेन की क्षमता बढ़ सकती है। इसके लिए तटबंध को छोड़ते हुए रीमॉडलिंग की जा सकती है। ऐसे में ड्रेन का कैचमेंट एरिया बढ़ने पर ही रीमॉडलिंग हो पाएगी। दूसरा ड्रेन का लेन प्लान, एल सेक्शन यथावत रहेगा। तीसरे बिंदु में संयुक्त निरीक्षण आख्या का पालन करना होगा । ड्रेन की भूमि का स्वामित्व सिंचाई विभाग का रहेगा। कार्य के दौरान सेक्शन के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। अब इस आधा पर शासन स्तर से ही एनओसी जारी करने के बारे में फैसला लिया जाना है।