पाइपलाइन में नहीं आ रहा गैस का प्रेशर
प्लांट संचालक अवधेश का दावा है कि अगर इसकी पूरी क्षमता का उपयोग हो, तो हर महीने करीब 11,000 सिलेंडर भरे जा सकते हैं। यह मात्रा आसपास के कई गांवों की रसोई गैस की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन फिलहाल प्लांट पर गैस को सिलेंडरों में भरने के लिए फिलिंग मशीन और कंप्रेसर की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण तैयार गैस का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। पंचायत सहायक शिव कुमार का कहना है कि अगर गैस फिलिंग मशीन मिल जाए तो गैस को सिलेंडरों में भरकर वितरित किया जा सकता है और इसका बेहतर उपयोग हो सकेगा।
ग्रामीण ले रहे भूसे के बदले खाद
गैस आपूर्ति भले ही शुरू नहीं हो पाई हो, लेकिन प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। ग्रामीण गोशाला में भूसा दान करते हैं और बदले में प्लांट से निकलने वाली खाद ले जाते हैं, जिसका उपयोग खेतों में किया जा रहा है। इससे किसानों को कुछ हद तक लाभ मिल रहा है, लेकिन योजना का मुख्य उद्देश्य यानी सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना अभी अधूरा है।
रोजगार और आमदनी बढ़ने का इंतजार
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और 15वें वित्त आयोग के बजट से बने इस गोवर्धन प्रोजेक्ट का मकसद किसानों से 2 रुपये प्रति किलो गोबर खरीदकर उनकी जेब भरना और स्थानीय युवाओं को रोजगार देना था, लेकिन जब तक गैस की सप्लाई बहाल नहीं होती या फिलिंग यूनिट नहीं लगती, तब तक किसानों की आमदनी और गांव की आत्मनिर्भरता का यह मॉडल अधूरा ही रहेगा।