इन इलाकों का बरसात में हो जाता है बुरा हाल
रामघाट मार्ग पर एडीए कॉलोनी, विष्णुपुरी, सुदामापुरी, गुरुद्वारा रोड, छर्रा अड्डा, नौरंगाबाद, मामू भांजा, अचलताल, गोविंदनगर, शाहजमाल ईदगाह रोड, तुर्कमानगेट समेत विभिन्न इलाकों में मानसून में बारिश के दौरान सड़कें डूब जाती हैं, जिससे घरों और दुकानों में पानी भर जाता है। निगम अधिकारी इस स्थिति के लिए शहर की कटोरेनुमा भौगोलिक स्थिति को जिम्मेदार ठहराते हैं।
नाले कीचड़-गंदगी से लबालब, ये है नालों की सफाई का हाल
अलीगढ़ शहर के एटा चुंगी बाईपास से गुजर रहे कमालपुर नाले की सफाई नहीं हो सकी है। मानसिंह नगला की पुलिया पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। इसमें कीचड़ व गंदगी तैर रही है, कूड़े के अंबार लगे हुए हैं। अचलताल से हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज, श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय की ओर जा रहा नाला गंदगी से अटा पड़ा है। शाहजमाल इलाका हर बार बारिश में डूब जाता है। इस बार भी वहां हालात ऐसे ही बने हुए हैं। नगर निगम ने यहां पंपिंग स्टेशन को सक्रिय कर दिया है। क्वार्सी चौराहे के पास पिछले एक महीने से नाला व सीवर लाइन की सफाई का काम चल रहा है। एक ओर की सड़क बंद है।
अंग्रेजों के जमाने की तीन ड्रेन पर टिकी है पूरी जल निकासी व्यवस्था
शहर की जल निकासी व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने में बनीं तीन ड्रेन पर टिकी है। शहर की सीमा में 12.976 किलोमीटर में फैला अलीगढ़ ड्रेन पानी निकासी का मुख्य स्रोत है। इससे इतना ही लंबा जाफरी ड्रेन और 4.724 किलोमीटर लंबा मथुरा-इगलास रोड ड्रेन जुड़े हुए हैं। ये दोनों ड्रेन शहर के 29 संपर्क नालों का पानी अलीगढ़ ड्रेन तक पहुंचाते हैं, जहां से पानी काली नदी में गिरता है। बारिश के दौरान जाफरी ड्रेन कटने से पिछले साल श्रीनगर, शिव शक्ति कॉलोनी में पानी भर गया था। अलीगढ़ ड्रेन का एक हिस्सा कट गया था, जिससे मडराक के कई गांव जलमग्न हो गए।
नियमों की अनदेखी, अधिकारियों की लापरवाही शहर में ड्रेनेज सिस्टम को लेकर अब तक कोई मास्टर प्लान नहीं बन सका है। शहर में बिल्डर बिना उचित बुनियादी ढांचे के ही कॉलोनियों का निर्माण कर रहे हैं। पुराने शहर में सीवर लाइन भी अब चोक हो चुकी हैं। इन्हें भी नालों से जोड़ दिया गया है। नालों की तली में कीचड़ जमी होने से बारिश में ओवरफ्लो हो जाते हैं। अब जो नाले बनाए जा रहे हैं, उनकी गहराई छह फुट और चौड़ाई पांच फुट है।