धरणीधर सरोवर की परिक्रमा करते श्रद्धालु। संवाद
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अधिक मास पर ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का सोमवार को समापन हो गया है। सोमवती अमावस्या पर धरणीधर सरोवर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यह परिक्रमा पिछले एक महीने से चल रही थी।
भक्तों ने तेज धूप में भी परिक्रमा की। सूरज की तपिश भी उनकी श्रद्धा को डिगा नहीं पाई। परिक्रमा मथुरा, अलीगढ़, राजस्थान और हरियाणा से होकर निकली। श्रद्धालुओं ने राधे राधे के जयघोष के साथ भजन कीर्तन किए। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह भंडारे की व्यवस्था की। धरणीधर सरोवर में स्नान और परिक्रमा के बिना इसे अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि परिक्रमा से 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है।
धरणीधर तीर्थ पर आरती और उत्साह
धरणीधर सरोवर पर सुबह 4:00 बजे से परिक्रमा शुरू हुई। परिक्रमा में बुजुर्गों और बच्चों में भी भारी उत्साह देखने को मिला। सोमवती अमावस्या के कारण दोपहर 12 बजे तक भारी भीड़ रही, जो शाम 4 बजे फिर बढ़ गई। देवभूमि धरणीधर तीर्थ में रोजाना शाम सात बजे आरती की जा रही है, जिसके मुख्य आरती करता पंडित संकेत कटारा हैं।