आयुषी गुप्ता ने अपना नाम श्रेष्ठ वार्ष्णेय से श्रेष्ठ गुप्ता करवा लिया। इसके लिए झूठा शपथ-पत्र और गलत दस्तावेज लगाए गए। बिना जोनल अधिकारी के आदेश और बिना किसी जांच के कंप्यूटर ऑपरेटर विजय बाबू ने नाम बदल दिया।
अलीगढ़ नगर निगम में जन्म प्रमाण-पत्र के नाम में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। मामला सही मिलने पर नगर आयुक्त ने तत्काल जोन एक के कंप्यूटर आपरेटर विजय बाबू की सेवा समाप्त कर दी। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और सहायक नगर आयुक्त तपस्या यादव को उसके द्वारा बनाए गए फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच का आदेश दिया है।
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आगरा रोड निर्भय नगर की आयुषी गुप्ता ने 4 नवंबर को अपना नाम श्रेष्ठ वार्ष्णेय से श्रेष्ठ गुप्ता करवा लिया। इसके लिए झूठा शपथ-पत्र और गलत दस्तावेज लगाए गए। बिना जोनल अधिकारी के आदेश और बिना किसी जांच के कंप्यूटर ऑपरेटर विजय बाबू ने नाम बदल दिया। मामला तब खुला जब उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय महामंत्री सतीश माहेश्वरी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय वार्ष्णेय ने नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा से लिखित शिकायत की।
आयुक्त ने तुरंत फाइल तलब की, स्टाफ को बुलाया और जांच की। जिसमें विजय दोषी मिला। नगर आयुक्त ने सख्ती दिखाते हुए आपरेटर विजय बाबू की सेवा तुरंत समाप्त कर दी। साथ ही आयुषी गुप्ता को 11 दिसंबर को नोटिस देकर तलब किया है। गलत तरीके से जारी किया गया प्रमाण-पत्र भी फिलहाल निलंबित कर दिया गया है।
जन्म-मृत्य प्रमाण पत्र के लापरवाही बरतने और फर्जी कार्य करने पर सख्ती से कार्यवाही की जाएगी। इसके द्वारा बनाए गए सभी प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी।-प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त