कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे करवा चौथ पूजन की सामग्री हैं।
करवा चौथ पूजन की विधि क्या है ?
प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृत होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें। व्रत के दिन निर्जला रहें। शाम के समय में मां पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसान पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर कलावा बांधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। मां पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें। भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करें। नए करवे में पानी भरकर पूजा करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित करें। चंद्रोदय के बाद चांद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिष्ठान खा कर व्रत खोले।
भद्रा का साया कब से कब तक है ?
पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि करवा चौथ पर भद्रा का अशुभ साया प्रातः 6:25 से शुरू होगा और प्रातः 6:46 तक रहेगा। केवल 21 मिनट के लिए भद्रा का अशुभ साया रहेगा।