एमपी-एमएलए कोर्ट/अपर सिविल जज (व. प्र.) दीपकनाथ सरस्वती के न्यायालय ने विधायक अंजुला सिंह माहौर के जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ दाखिल परिवाद खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना कि सीआरपीसी की धारा 202(2) के तहत जांच आख्या में विधायक अंजुला सिंह का जाति प्रमाणपत्र वैध है, इसलिए विपक्षी को विचारण के लिए तलब करने का आधार पर्याप्त नहीं है। परिवाद खारिज किए जाने किए जाने योग्य है।
करीब एक साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. केशवदेव गौतम ने सदर विधायक अंजुला माहौर के जाति प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अंजुला माहौर ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। उन्होंने मायके की जाति छिपाकर अपनी ससुराल की जाति के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाया है।
न्यायालय ने इस मामले में सीआरपीसी की धारा 202(2) के तहत जांच आख्या मांगी थी। इसमें विधायक की जाति कोरी बताई गई और उसे अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई है। तहसीलदार सदर आगरा की आख्या में यह कथन किया गया कि प्रमाणपत्र से विपक्षी की जाति कोरी है। इस लिहाज से विधायक का जाति प्रमाणपत्र आज की तिथि में वैध है। इस आधार पर न्यायालय ने परिवाद को खारिज कर दिया।