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आते हैं शान से, लेकिन जाते हैं परेशान से।

Tue, 16 May 2017 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति आते हैं शान से, लेकिन जाते हैं परेशान से। एएमयू के 40 वें कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह के कार्यकाल के अंतिम दिनों में हंगामा और विवाद के बीच इस बात की चर्चा एक बार फिर से हुई। आज यानी 16 मई शाह के कार्यकाल का आखिरी दिन है। उनके कार्यकाल में पिछले वर्ष प्रॉक्टर आफिस पर दो पूर्व छात्रों की हत्या के बाद कैंपस में उपद्रव के दौरान आगजनी और तोड़फोड़ के रूप में बड़ी घटना हुई। उसी समय वीसी लॉज फूंकने और वीसी पर हमले की कोशिश की गई। चर्चा यहां तक थी कि अगर वीसी सतर्क न रहते, तो उनके साथ कुछ भी हो सकता था।
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ले. जनरल शाह से पहले प्रो. पीके अब्दुल अजीज एएमयू के कुलपति थे। पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से करीब पांच महीने पहले 65 वर्ष की उम्र पूरी करने के कारण वे चले गए थे। उनके कार्यकाल के दौरान ही एक छात्र की हत्या के बाद आक्रोशित भीड़ ने वीसी लॉज को फूंक दिया था। प्रो. अजीज से पहले आईएएस आफिसर नसीम अहमद एएमयू के कुलपति रहे। लेकिन अपना कार्यकाल पूरा करने के चंद महीने पहले वह परेशान होकर चले गए थे। कहा जाता है कि एक लड़के ने रजिस्ट्रार ऑफिस के गेट पर ताला मारकर चाबी नसीम अहमद की ओर फेंक दी थी। यह भी कहा जाता है कि आखिरी दिनों में अधिकारियों का रुख भी बदल गया था। वर्तमान उप राष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी का 20 महीने का कार्यकाल शानदार रहा था। 65 की उम्र पूरी होने पर वे चले गए। मो. हामिद अंसारी से पहले महमूद उर रहमान एएमयू के कुलपति थे। वह इन पांचों में इकलौते कुलपति हैं, जो पांच साल से कुछ अधिक समय रहे। हालांकि कार्यकाल पूरा कर जाने के वक्त छात्रों ने वीसी लॉज में उन्हें घेर लिया था। महमूद उर रहमान को दूसरे गेट से निकाला गया था। वर्ष 1965 में एएमयू के एक कुलपति के साथ तो हाथापाई भी हुई थी, जिसमें दो छात्र नेताओं को जेल जाना पड़ा था।
 
1. ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह - 17 मई 2012 से आज तक
2. प्रो. पीके अब्दुल अजीज - 11 जून 2007 से 17 जनवरी 2012 तक
3. नसीम अहमद (आईएएस) - 8 मई 2002 से 7 अप्रैल 2007 तक 
4. मो. हामिद अंसारी (आईएफएस) - 28 मई 2000 से 30 मार्च 2002 तक
5. महमूद उर रहमान  (आईएएस) - 1 मई 1995 से 28 मई 2000 तक 

- विरोध उसी का होता है जो अपने कार्यकाल में गुटबंदी में फंस जाता है और नियम-कानून का उल्लंघन कर अपने चहेते को लाभ पहुंचाता है। मो. हामिद अंसारी, नसीम फारूकी, हाशिम अली, प्रो. अली मोहम्मद जैसे कई कुलपति हुए, जिनके जाते वक्त लोगों की आंखों से आंसू छलक गए थे। लोग आज भी उन्हें श्रद्धा से याद करते हैं।
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- खुर्शीद अहमद (1952 में एएमयू छात्र रहे। यहीं डिप्टी फाइनेंस आफिसर बने और सर्वाधिक 12 वीं बार एएमयू कोर्ट सदस्य बने। ऑल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।)

- वर्तमान वीसी शान से आए हैं और शान से जाएंगे। एएमयू के 40 साल के इतिहास में 9 वीसी देखे, लेकिन इतना कामयाब वीसी नहीं देखा। जनरल शाह दयालु इंसान, ईमानदार एवं सख्त प्रशासक हैं। जो लोग पांच साल तक पावर इंज्वाय नहीं कर पाए, वहीं हवा दे रहे हैं। ग्रैंड फेयरवेल पार्टी में अपराधी प्रवृत्ति के बाहरी लोग थे, जिसकी निंदा करता हूं। 
- प्रो. मो. हामिज इलियास खान (ग्रांड फेयरवेल कमेटी के सह संयोजक। मनोविज्ञान विभाग के चेयरमैन। चौथी बार एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य हैड्ड। एएमयू में छात्र एवं शिक्षक) 
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