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Aligarh News: जायके में आत्मनिर्भरता की महक बिखेर रही कलेक्ट्रेट की शक्ति रसोई

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कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित शक्ति रसोई में काम करती महिलाएं। - फोटो : samvad
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कहावत है कि सफलता का रास्ता इंसान के पेट से होकर गुजरता है, लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित शक्ति रसोई ने साबित कर दिया है कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सम्मान का रास्ता भी इसी रसोई के जायके से होकर निकलता है।
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राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत शुरू हुई यह रसोई आज सिर्फ कलेक्ट्रेट आने वालों की भूख ही नहीं मिटा रही, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की एक खूबसूरत मिसाल बन चुकी है।


इस कामयाबी की सूत्रधार हैं प्रेमलता सिंह। करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने सरोज, नेहा और ऊषा के साथ मिलकर एक छोटा सा सपना देखा था। एक ऐसी रसोई का, जहां घर जैसा शुद्ध खाना मिले और महिलाओं को रोजगार। आज यह पहल एक वटवृक्ष बन चुकी है, जिसने कई महिलाओं के जीवन में स्वावलंबन का रंग भर दिया है।
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शक्ति रसोई की संचालिका प्रेमलता सिंह बताती हैं कि इस रसोई से प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये की आय हो जाती है, जिससे परिवार की आजीविका शानदार तरीके से चल रही है। सबसे बड़ी संतुष्टि इस बात की है कि वह अन्य महिलाओं को भी रोजगार देने में सक्षम हो गई हैं।
शक्ति रसोई स्वाद, सेहत और किफायत का बेजोड़ संगम पेश कर रही है। प्रेमलता और उनकी टीम सभी मसाले खुद तैयार करती हैं, जिससे भोजन की गुणवत्ता और स्वाद बरकरार रहता है। यहां पर शाही थाली में दो सब्जी, चार रोटी, चावल, रायता, सलाद और मीठे में गरमा-गरम हलुआ मिलता है।


पराठा प्लेट में दो पराठे, तीखी चटनी और आचार। क्विक बाइट्स मे छाछ, सैंडविच, ब्रेड पकौड़ा या दाल-चावल शामिल हैं। इसके अलावा स्पेशल प्लेट में लाजवाब छोले-चावल और राजमा-चावल शामिल हैं। इस शुद्ध और घरेलू भोजन के मुरीद केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट के कर्मचारी और अधिवक्ता भी हैं।
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