परिवाद में इन सभी पर आय से अधिक संपत्ति का भी आरोप है। मामले में सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी, चिकित्सा अधीक्षक जवां डॉ. अंकित, सीएमओ कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी रोहित सक्सेना, आईडीएसपी पुष्पेंद्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ सहायक कमल कुमार और बाबू रणधीर चौधरी को आरोपी बनाया।
अस्पताल खोलने के नाम पर रुपये मांगने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों में अलीगढ़ सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी सहित सात स्वास्थ्य अधिकारियों को जांच समिति के समक्ष तलब किया गया है। उप लोकायुक्त के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। समिति ने सभी आरोपियों को चार फरवरी को साक्ष्यों सहित अपना पक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। शिकायत पर यह आदेश चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की निदेशक (प्रशासन) डॉ. अलका वर्मा ने 22 जनवरी को जारी किया है।
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खैर क्षेत्र के गांव बिसारा निवासी सोनू कुमार ने 15 जनवरी को उप लोकायुक्त के समक्ष परिवाद दायर किया, जिसमें कहा कि अस्पताल खोलने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई थी। इसमें से एक लाख रुपये सीएमओ कार्यालय के बाबू रणधीर चौधरी को दिए गए, जिसका वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध कराया गया है। यही नहीं पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. रोहित गोयल पर हर गोविंद मिश्रा से व्हाट्सएप पर रिश्वत मांगने का आरोप है।
परिवाद में इन सभी पर आय से अधिक संपत्ति का भी आरोप है। मामले में सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी, चिकित्सा अधीक्षक जवां डॉ. अंकित, सीएमओ कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी रोहित सक्सेना, आईडीएसपी पुष्पेंद्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ सहायक कमल कुमार और बाबू रणधीर चौधरी को आरोपी बनाया। उप लोकायुक्त की सचिव डॉ. रीमा बंसल ने पांच अगस्त 2025 को प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर निदेशक (प्रशासन), अपर निदेशक (प्रशासन) और अनु सचिव की समिति गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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सोनू कुमार का आरोप है कि पूर्व जांच में सभी को क्लीन चिट मिल गई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने नया परिवाद दायर किया। उन्होंने यह भी कहा कि निलंबन पर हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद बाबू रणधीर चौधरी ने सीएमओ कार्यालय में ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी, जबकि उन्हें एडी हेल्थ आगरा के कार्यालय से संबद्ध किया गया था।