जिले में फिलहाल रोटावायरस वैक्सीन की कमी बनी हुई है। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से टीकाकरण का सुरक्षा चक्र टूट रहा है। जो आपूर्ति हो भी रही है, वह टुकड़ों में हो रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा हेपेटाइटिस के टीके की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिमाह लगभग 40 हजार रोटावायरस वैक्सीन की खुराक की आवश्यकता होती है। वर्तमान में इस टीके की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही। बताया जा रहा है कि टीके को बनाने वाली कंपनी अपने प्लांट को अपग्रेड कर रही, जिसकी वजह समस्या आई है। यह स्थिति पिछले करीब एक वर्ष से बनी हुई है। रोटावायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर दस्त और उल्टी के साथ निर्जलीकरण का कारण बनता है।गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। रोटावायरस वैक्सीन इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर टीकाकरण न होने से बच्चे इस गंभीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
25 जून को पहुंची खेप, सोमवार से होगा टीकाकरण
स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मिली है कि बृहस्पतिवार (25 जून) को लखनऊ से पोलियो वैक्सीन के साथ रोटावायरस वैक्सीन की खेप पहुंची है। जिसे सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचाया जा रहा है। सोमवार से इसका नियमित टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा।
निजी क्षेत्र में 700 से 800 का यह टीका
बच्चों को यह टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क लगाया जाता है, लेकिन निजी क्षेत्र के अस्पतालों में यह टीका 700 से 800 रुपये कीमत तक में लगाया जाता है। ऐसे में सरकारी सेवाओं के सहारे रहने वाले परिवारों को टीका न मिलने के कारण आर्थिक बोझ से भी जूझना पड़ता है।
एक माह से हेपेटाइटिस का टीका भी नहीं मिला
जिले में रोटावायरस के साथ-साथ एक माह से बच्चे के जन्म के समय लगने वाला हेपेटाइटिस का टीका भी नहीं मिला है। कुछ समय से रोटावायरस व हेपेटाइटिस के टीके की आपूर्ति गड़बड़ाई है। उसकी डिमांड भी लखनऊ भेज दी गई है। इस टीके के भी एक-दो दिन में मिलने के संकेत हैं। फिलहाल रोटावायरस का टीके की एक खेप जिले को मिल गई है। अभी कोई समस्या नहीं होगी और नियमित टीकाकरण होगा। -डॉ.मोहन झा, अपर निदेशक स्वास्थ्य