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अधिकारियों से सीधे संवाद करेंगे बच्चे

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अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस 20 नवंबर शुक्रवार को बच्चे और किशोर सीधे अपने जिले के अधिकारियों से संवाद स्थापित कर सकेंगे। महिला कल्याण और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के तत्वावधान में चलाये जा रहे मिशन शक्ति अभियान के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ग्राम व ब्लाक स्तर पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में शक्ति संवाद किया जाएगा।
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मिशन शक्ति अभियान की नोडल अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए चलाये जा रहे मिशन शक्ति अभियान की हर माह की अलग-अलग थीम है। नवंबर माह की थीम मानसिक स्वास्थ्य तथा मनो सामाजिक मुद्दों से सुरक्षा और सपोर्ट तय की गई है। इसी के तहत शक्ति संवाद का लक्ष्य बच्चों व किशोरों में होने वाले मानसिक और भावनात्मक परिवर्तनों के बारे में उनमें, उनके परिवार व समुदाय के बीच अधिकारियों के जरिये सीधे संवाद कर जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसके अलावा मानसिक समस्याओं तनाव, अवसाद के लक्षणों, उनके व्यवहारिक, शारीरिक व भावनात्मक संकेतों की पहचान की जायेगी। कार्यक्रम में किशोर उम्र के लड़के-लड़कियां, विशेष रूप से जरूरतमंद, दिव्यांग, पहले से मानसिक विकार के शिकार, घरेलू हिंसा, शारीरिक, यौन, भावनात्मक शोषण या उपेक्षा के शिकार या उससे प्रभावित बच्चे, परिवार व समुदाय को शामिल किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयश कुमार ने बताया कि शक्ति संवाद के तहत ग्राम व ब्लाक स्तर के अलावा जनपद स्तर पर भी आइये 20 नवंबर को हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य की परिकल्पना करें पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जनपद स्तर पर शक्ति संवाद का शुभारंभ जिलाधिकारी या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। टीवी व रेडियो पर संदेश भी प्रसारित किया जा सकता है। वयस्क भी जानें बच्चों के अधिकार पर पंचायत स्तर पर भी क्विज व प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
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महिला कल्याण अधिकारी वर्षा शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में हर जिले से एक किशोर व एक किशोरी को चयनित कर जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय स्थित हेल्पलाइन पर बच्चों की समस्याओं को सुनकर उनको परामर्श देने का काम किया जाएगा। फेसबुक पर भी अधिकारियों की अध्यक्षता में लाइव सत्र का आयोजन किया जाएगा। जिसमें शिक्षक, ग्राम प्रधान, किशोर, अभिभावक एवं मार्ग दर्शक के रूप में विशेषज्ञों को जोड़ा जाएगा। बाल गृह, आश्रम शाला आदि में बच्चों से उनकी समस्याओं पर चर्चा की जायेगी। कार्यक्रमों में सामुदायिक बाल व किशोर मानसिक स्वास्थ्य सेवा परियोजना और बाल व किशोर मनोरोग विभाग, निम्हैंस, बेंगलुरु का भी सहयोग रहेगा।
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