शैक्षिक सत्र का नया सत्र चार अप्रैल से शुरू हो रहा है। नए शैक्षिक सत्र में नई ऊर्जा के साथ बच्चों में काफी उमंग होगी। कोरोना के बाद स्कूल खुले तो बच्चों के आने की तादाद में रोजाना इजाफा होता रहा। हर दिन वह कोरोना को मात देते रहे। इसका श्रेय अभिभावकों को जाता है, जिन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजने की जिजीविषा दिखाई। दो साल की कोरोना महामारी से निपटना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नामुमकिन नहीं है।
कोरोना महामारी के बाद स्कूल खुलने के साथ चुनौतियां भी थीं। मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी इन चुनौतियों के साथ खुला। स्कूल प्रशासन लगातार अभिभावकों और बच्चों को प्रोत्साहित करता रहा। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की उपस्थिति कम थी, क्योंकि कुछ बच्चे और अभिभावक इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा नहीं मान रहे थे। वहीं, कुछ ने फीस बचाने के लिए भी ऑनलाइन शिक्षा से दूरी बनाई। इंटरनेट समस्या के चलते बच्चे ऑनलाइन नहीं जुड़ पाते थे।
कोरोना काल में बच्चों और उनके अभिभावकों ने अपने को खोया और नौकरी चली गई, व्यवसाय ठप हो गया। इससे बच्चे और अभिभावक अवसाद में चले गए थे। शहर में जो किराये पर लेकर रहते थे, वह कोरोना काल में अपने गांव पलायन कर गए। बच्चे ड्रॉप आउट हो गए। स्कूल प्रशासन ने ऐसे बच्चों के लिए सहूलियतें मुहैया करायी है, ताकि वह एजूकेशन सिस्टम में आ सकें।
सीखने की प्रक्रिया एक चढ़ती सीढ़ी की तरह होता है। सीढ़ी चढ़ते वक्त एक सीढ़ी लांघना जोखिम हो सकता है। इसी तरह दो साल का लंबा अंतराल है, जिसे लांघना चुनौती पूर्ण है। बच्चे जो ऑनलाइन क्लास से जुड़े रहे, धीमी ही सही, लेकिन सीखने की प्रक्रिया में जुड़े रहे। कुछ सीखते रहे। अब स्कूल और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों की पढ़ाई को पटरी पर लाएं। नए जोश के साथ बच्चे नए सत्र में आएंगे।
-आरती मित्तल, प्रधानाचार्या, मदर्स टच सीसे स्कूल
कोरोना के बाद स्कूल खुलने पर सबसे ज्यादा खुशी बच्चों को देखने को मिली, क्योंकि वह दो साल से घर पर रहकर बोर हो गए थे। स्कूल में आते ही उनमें कुछ दिनों में वह जोश और जज्बा दिखने लगा, जो शुरू के दिनों में नहीं दिख रहा था। बच्चों की जिंदगी अनुशासित हो गई है। स्कूल में बच्चों को नैतिक मूल्यों को जानने-समझने का मौका मिलता है। यही स्कूल की सबसे बड़ी पूंजी है।
-डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी, संयुक्त सचिव, अलबरकात स्कूल
कोरोना काल में कुछ दिन के लिए स्कूल खुले थे। इस दौरान स्कूल जाना हुआ। यह एक अच्छा अनुभव था। नए सत्र में नियमित स्कूल आएंगे।
-अनन्य दानवीर सिंह, कक्षा 6, संत फिदेलिस स्कूल
लंबे समय के बाद स्कूल आना एक सुखद अनुभूति रही। ऑनलाइन से बेहतर ऑफलाइन की पढ़ाई है। अप्रैल से स्कूल नियमित आने का इरादा है।
-अरना नंदन, कक्षा 9, हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल
कोरोना महामारी से बच्चों की पढ़ाई को काफी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई जल्दी नहीं हो सकती। इस भरपाई की जिम्मेदारी स्कूल को निभानी पड़ेगी।
-भानु प्रकाश अग्रवाल, अभिभावक
स्कूल खुले तो अच्छा लगा। ऑनलाइन पढ़ाई से ज्यादा ऑफलाइन पढ़ाई प्रभावशाली है। बच्चों को जिस तरह शिक्षा स्कूल में मिलती है, वह कहीं नहीं मिल पाती।
-यतेेंद्र पाल सिंह, अभिभावक