स्कूल में उल्टे पड़े बर्तन। संवाद
उत्तर प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के पोषण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। विकास खंड बिजौली के गांव हारनपुर कलां स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील योजना दम तोड़ती नजर आई। विद्यालय में पढ़ने वाले मासूम छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन नसीब नहीं हुआ।
सोमवार को टीम ने जब विद्यालय में वास्तविकता की पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। दोपहर के भोजन का समय होने के बावजूद स्कूल की रसोई में चूल्हा ठंडा पड़ा था। पड़ताल के दौरान रसोई में बर्तन उल्टे पड़े मिले, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहां भोजन पकाने की कोई तैयारी ही नहीं की गई थी।
छात्रों
की जुबानी, हमें कुछ नहीं मिला खाने को
जब टीम ने स्कूल के छात्र-छात्राओं से पूछताछ की तो उनकी मासूमियत ने सिस्टम की पोल खोल दी। बच्चों ने बताया कि आज उन्हें स्कूल में खाने-पीने की कोई भी चीज नहीं दी गई है। भूख से परेशान बच्चे पढ़ाई छोड़ मिड-डे मील का इंतजार करते नजर आए, लेकिन अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस अव्यवस्था के संबंध में जब विद्यालय के इंचार्ज संदीप शर्मा से वार्ता की गई, तो उन्होंने बड़ी सहजता से अपना पल्ला झाड़ लिया। इंचार्ज का कहना था कि गैस खत्म होने के कारण सोमवार को खाना नहीं बन सका।