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Lok Sabha Election: बसपा का टिकट बदलना न बन जाए भाजपा के लिए परेशानी, एक बार जीती, कई बार रही टॉप तीन में

Tue, 02 Apr 2024 03:20 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

बसपा ने अनुसूचित-मुस्लिम गठजोड़ को बदलकर अनुसूचित ब्राह्मण गठजोड़ के सहारे नया दांव चला है। अब भाजपा और बसपा दोनों प्रमुख दलों से ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं। ये बदलाव भाजपा की परेशानी का सबब न बन जाए ?
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भाजपा बनाम बसपा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अलीगढ़ जिले में बसपा का राजनीतिक रसूख बरकरार है। बेशक पार्टी अब तक वर्ष 2009 में केवल एक बार लोकसभा चुनाव जीती है, मगर पिछले 40 वर्ष में पार्टी अधिकांश चुनाव में टॉप थ्री में रही है। ऐसे में बसपा ने अनुसूचित-मुस्लिम गठजोड़ को बदलकर अनुसूचित ब्राह्मण गठजोड़ के सहारे नया दांव चला है। अब भाजपा और बसपा दोनों प्रमुख दलों से ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं। ये बदलाव भाजपा की परेशानी का सबब न बन जाए ? इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

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बसपा की स्थापना 14 अप्रैल 1984 को हुई। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव परिणामों पर गौर करें तो वर्ष 1989 में पार्टी 35 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। 1991 के चुनाव में प्रदर्शन थोड़ा कमजोर हुआ और 21 हजार वोटों के साथ चौथा स्थान मिला। दोनों बार प्रत्याशी रामसहाय रहे। 1996 के चुनाव में पार्टी ने दमखम दिखाया और अनुसूचित मुस्लिम गठजोड़ के सहारे अब्दुल खालिक 1.42 लाख वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। 1998 के चुनाव में फिर चंद्रपाल ने एक लाख वोटों के सहारे तीसरा स्थान पाया। 

1999 में साहब सिंह 1.38 लाख वोटों के सहारे दूसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2004 के चुनाव में ठॉ.जयवीर सिंह 1.59 लाख वोटों के सहारे चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 2009 के चुनाव में 1.93 लाख वोटों के सहारे जयवीर सिंह की पत्नी राजकुमार चौहान ने जीत दर्ज की और वर्ष 2014 के चुनाव में उनके पुत्र अरविंद 2.27 लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा सपा गठबंधन के सहारे अजीत बाल्यान चार लाख से अधिक वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे। 
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इस बार पहले मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर पार्टी ने मुस्लिम दलित गठजोड़ का संदेश दिया। मगर प्रत्याशी गुफरान नूर के बीमार होने के चलते बदलाव किया गया है। खास बात यह है कि हितेंद्र उपाध्याय पहली बार किसी दल से टिकट लेकर आए हैं। हालांकि 2017 में उन्होंने बरौली से भाजपा का विधानसभा का टिकट मांगा था, मगर मिल नहीं सका। अब उनको बसपा ने संसदीय सीट से उतारा है। भाजपा और बसपा दोनों दलों से ब्राह्मण प्रत्याशी होने का क्या परिणाम होगा। ये आने वाला समय बताएगा।

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