यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने भारत सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारियों को उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से श्रेष्ठ बताया है। सीआईसी ने कहा कि आरटीआई की धारा 4 में एक प्रावधान है कि कि शासन का प्रत्येक विभाग स्वत संज्ञान के तहत अधिक से अधिक सूचनाओं को बेवसाइट पर उपलब्ध कराए। यूपी में अधिकारी विभागीय बेवसाइटों पर सूचनाएं उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। उतनी सूचनाएं भी नहीं हैं जितनी होनी चाहिए। इससे सूचना मांगने के आवेदन बढ़ते जा रहे हैं। भारत सरकार के विभागों की बेवसाइट अच्छी डिजायन हैं। अधिक से अधिक अपडेट रहती हैं। यूपी में अपीलीय अधिकारी बेहतर काम करें तो आयोग पर आवेदन कम पहुंचे। वर्तमान में सूचना आयोग में 48 हजार मामले लंबित हैं।
मंगलवार को सूचना के अधिकार को लेकर आयोजित मंडलीय कार्यशाला के शुभारंभ के बाद कमिश्नर कक्ष में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने आरटीआई के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। कहा कि ईमेल के माध्यम से कोई व्यक्ति एप्लीकेशन फाइल कर सके और उसको उसी फारमेट में जानकारी दी जा सके इसके लिए प्रयास हो रहे हैं।
मुख्य सूचना आयुक्त ने स्वीकार किया कि सूचना मांगने वाले की जान को खतरा है। उनका कहना था कि ‘आरटीहआई से कोई सूचना मांगता है तो मेरा मानना है कि कोई न कोई इससे प्रभावित होता है। विशेषकर भ्रष्टाचार से जुड़ी सूचनाएं मांगने पर। मैंने मुख्य सचिव को इस संबंध में लिखा है। इसके बाद सभी डीएम और एसएसपी को कुछ समय पहले ही निर्देश जारी किए गए हैं कि वह आरटीआई आवेदक को सुरक्षा सुनिश्चित करें। आवेदक को एक प्रार्थना पत्र डीएम - एसएसपी को देना होगा कि सूचना मांगने पर अमुक व्यक्ति रहा है या अमुक से खतरा है।’ शासकीय अधिकारियों का समय खराब नहीं हो इसलिए यह प्रावधान किया गया है कि आवेदन में 500 शब्द से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन हम सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं कि वह 500 शब्द की व्याख्यादिल खोल कर रकें। कोई स्वैच्छिक संस्था या निजी संस्था यदि क्रियेट बाई लॉ एवं संस्पेडली फंडिड है तो वह आरटीआई के दायरे में आती हैं। राजनैतिक दल द्वारा सूचना न देने संबंधी कोई मामला आयोग नहीं पहुंचा है। यदि आएगा तो उस पर आयोग नियमानुसार विचार करेगा।