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सीबीआई पहुंची जेल..हाथरस कांड के आरोपियों के दर्ज हुए बयान

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जिला कारागार मेंदुष्कर्म के आरोपियों से पूछताछ कर वापस आते सीबीआई के अधिकारी। - फोटो : CITY OFFICE
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हाथरस कांड की जांच में जुटी सीबीआई टीम का सोमवार का दिन जेल और मेडिकल कॉलेज के नाम रहा। टीम ने सुबह ही अलीगढ़ में दस्तक दे दी और दो खेमों में बंटकर टीम जिला कारागार व जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंची। जेल में डीएसपी सीमा पाहुजा की अगुवाई में पहुंची छह सदस्यीय टीम ने सात घंटे तक एकांत में एक-एक कर चारों आरोपियों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। यह टीम हाथरस न्यायालय का बयान लेने संबंधी आदेश लेकर पहुंची थी। उम्मीद है कि अब जल्द रिमांड आवेदन कर सकती है या फिर से भी पूछताछ के लिए आ सकती है। इस दौरान जेल प्रशासन व जेएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।
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टीम ने अलीगढ़ शहर में सुबह 10 बजे ही दस्तक दे दी थी। एक टीम सीधे मेडिकल कॉलेज करीब साढ़े दस बजे पहुंची, जबकि सीमा पाहुआ की अगुवाई वाली टीम करीब 11:52 पर जेल पर पहुंची। यहां जेल गेट पर अपना परिचय व अदालत का आदेश दिखाते हुए लिखा पढ़ी में प्रवेश किया। इसके बाद कारागार अधिकारियों ने चारों आरोपियों क्रमश: संदीप, रामू, लवकुश व रवि को कारागार के लिपिक ऑफिस बिल्डिंग में चारों को उनके समक्ष पेश कर लिया। इसके बाद कारागार प्रशासन ने पूरी तरह सीबीआई टीम व आरोपियों से दूरी बना ली। फिर वहां चारों से सीबीआई टीम का एक-एक सदस्य अलग-अलग पूछताछ करने व बयान दर्ज करने में जुट गया। यह क्रम निरंतर शाम सवा सात बजे तक चला और 7:25 बजे टीम जेल से रवाना हो गई। सूत्रों की मानें तो इस दौरान संदीप से टीम के अधिकारी-कर्मचारी कुछ ज्यादा ही पूछताछ करते रहे। कानून के जानकारों के अनुसार चूंकि सीबीआई टीम कोर्ट का आदेश लेकर बयान दर्ज करने आई थी। इनसे बातचीत में जो भी सामने आया होगा, उन तथ्यों पर बाहर काम करेगी। जरूरत हुई तो फिर पूछताछ करने आ सकती है या फिर सीधे रिमांड भी मांग सकती है।
सात घंटे में खाना भी नहीं, सिर्फ चाय-नाश्ता
सीबीआई टीम के सात घंटे जेल के अंदर रहने के दौरान कारागार अधिकारी भी परेशान रहे। इस दौरान चाय-नाश्ता खुद कारागार अधिकारियों की ओर से टीम को भेजा गया और उनकी ओर से पानी की डिमांड रही। मगर इस दौरान किसी ने खाने तक की जरूरत महसूस नहीं की।
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मेडिकल में सीबीआई ने आठ घंटे में आठ डाक्टरों से की पूछताछ
हाथरस की बिटिया के प्रकरण में मामले की जांच करने के लिए सीबीआई की एक टीम सोमवार को जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंची। यहां पर टीम ने आठ घंटे तक बिटिया के इलाज करने वाले संबंधित विभागों के आठ डॉक्टरों और दर्जन भर से अधिक स्टाफ के सदस्यों से पूछताछ की। इस दौरान टीम ने उपचार की डिटेल, दवाएं, मेडिकोलीगल का विवरण आदि सभी कुछ जुटाया। शाम सात बजे टीम मेडिकल कॉलेज से वापस चली गई।
सीबीआई की दो सदस्यीय टीम सोमवार को सुबह 11 बजे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंची। सबसे पहले उन्होंने प्रिंसिपल आफिस का रुख किया। यहां कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के आफिस पहुंची। इस बीच संबंधित विभाग जैसे माइक्रोबायलोजी, स्त्री रोग विभाग, न्यूरोलोजी विभाग, इमरजेंसी, आईसीयू आदि के संबंधित डॉक्टरों स्टाफ को सूचित कर दिया गया कि वह पूछताछ के लिए आमंत्रित हों। मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक टीम ने हाथरस की बेटी के भर्ती होने से और उसको दिल्ली रेफर किए जाने तक के सभी दस्तावेज जुटाए हैं।
टीम ने पीड़िता की फोरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट सहित उपचार का विवरण बारीकी से जांचा और उसकी कापी अपने पास सुरक्षित की। बताया जाता है कि टीम ने सभी दवाओं के नाम और उपचार के दौरान दवाएं आदि दिए जाने का अंतराल भी नोट किया है। इसके साथ ही वह उपचार जो पीड़िता को दिया जा सकता था और संसाधनों के अभाव में नहीं मिल सका है, इसकी भी जानकारी की है। टीम ने उपचार के दौरान पीड़िता से मिलने कौन-कौन और कब-कब आया, इसका भी विवरण जुटाया है। साथ ही यह कि कितनी देर वह रुका, यह भी जानकारी की है। पीड़िता के साथ रात को कौन रुकता था, मेडिकल कॉलेज में लाने के बाद पहले सामान्य वार्ड में उसके बाद आईसीयू और उसके बाद दिल्ली रेफर किए जाने के पूरे क्रम की जानकारी की। यह भी कि दिन प्रतिदिन पीड़िता के स्वास्थ्य में किस तरह सुधार या गिरावट आनी शुरू हुई, यह भी विवरण जुटाया है। शाम को सात बजे टीम मेडिकल कॉलेज से वापस चली गई। संकेत हैं कि टीम एक बार फिर आ सकती है।
- सीबीआई की टीम को जांच में सहयोग किया जा रहा है। यह मामला न्यायालय की निगरानी में है और जांच भी चल रही है इसलिए इस पर किसी तरह की टिप्पणी किया जाना संभव नहीं है
विश्वविद्यालय प्रवक्ता
सीबीआई की टीम मेडिकल कॉलेज आई थी। जो भी जानकारी उन्होंने मांगी, उपलब्ध कराई गई। उनकी जांच गोपनीय है और उनका अपना तरीका है। शाम को टीम वापस चली गई।
- प्रो. वसीम अली, प्राक्टर, एएमयू
सौ साल के इतिहास में तीसरी बार सीबीआई कैंपस में आई
मुस्लिम विश्वविद्यालय के सौ साल के इतिहास में यह तीसरा ऐसा अवसर है जब सीबीआई की टीम कैंपस में दाखिल हुई है। दो बार सीबीआई की टीम विश्वविद्यालय के मामले में जांच करने के लिए कैंपस में आई, जबकि एक बार हाथरस की बिटिया के मामले में जांच करने अब कैंपस में दाखिल हुई है।
विश्वविद्यालय के मामलों की जानकारी रखने वालों के मुताबिक इसके सौ वर्ष के इतिहास में सबसे पहली बार सीबीआई तत्कालीन कुलपति महमूद उर रहमान के कार्यकाल में आई थी। वह 1998 से 2003 तक कुलपति रहे। उस समय विश्वविद्यालय के नदीम नाम के छात्र की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया और आरोपी भी हाथ नहीं लग रहा था। इस मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम आई और मामले का खुलासा हुआ।
इसके बाद दूसरी बार सीबीआई की टीम सन् 2007 के बाद कुलपति रहे प्रो. पीके अब्दुल अजीज के समय कैंपस में आई. प्रो. अजीज पर आरोप था कि उन्होंने दो लाख रुपये विश्वविद्यालय के कोष से लेकर अपनी निजी यात्रा पर खर्च किया। इस मामले ने कैंपस में बहुत तूल पकड़ा और मामले की सीबीआई जांच हुई। यहां पर दिलचस्प तथ्य यह चर्चा में रहा कि दो लाख रुपये के घपले की जांच करने के लिए दो करोड़ रुपये खर्च हो गए। हालांकि बाद में वह दो लाख रुपये प्रो. पीके अब्दुल अजीज ने अपने निजी खाते से विश्वविद्यालय के खाते में जमा भी कर दिए। इसके बाद अब ताजा हाथरस मामले में सीबीआई सोमवार को कैंपस में मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए आई थी।
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