हमारे शहर ने आजादी के बाद से लेकर 2006 तक यानि बहुत कुछ झेला। मगर 1978 के बहुचर्चित भूरा पहलवान हत्याकांड के बाद जो हुआ, उसे याद कर उस पीढ़ी के लोग आज भी सिहर उठते हैं। चार बरस तक अनवरत शहर ने दंगे झेले। तभी जस्टिस माथुर आयोग की सिफारिश पर शहर में धार्मिक आयोजनों के मार्गों व स्थानों की परंपराएं बदली गईं। प्रदेश के प्रमुख संवेदनशील शहरों की तर्ज पर अलीगढ़ में ला-एंड-ऑर्डर स्कीम लागू की गई। जो आज भी यथावत है। उस स्कीम के तहत जिले में तैनात थाना स्तर तक के पुलिस प्रशासनिक अफसरों को यह मालूम रहता है कि अगर शहर में रेड या यलो अलर्ट के तहत स्कीम लागू हो या सूचना प्रसारित हो तो उन्हें किस निर्धारित ड्यूटी स्थल पर पहुंचना है।