फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टाइम कैप्सूल दफनाने का जिक्र ऐतिहासिक दस्तावेजों में नहीं : प्रो. इरफान हबीब

विज्ञापन
प्रो. इरफान हबीब - फोटो : ??? ?????
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में डेढ़ सौ वर्ष पहले सर सैयद के समय में स्थापना के दौरान जमीन में टाइम कैप्सूल दफनाए जाने के संबंध में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने दावा किया है कि इस बात का कोई जिक्र ऐतिहासिक दस्तावेज में नहीं मिलता है। न सर सैयद ने इस बात का जिक्र कहीं किया है और न उनके समकालीनों ने कहीं उल्लेख किया है।
विज्ञापन

अमर उजाला से खास बातचीत में प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि सर सैयद अहमद ने शायद उस समय यह सोचा ही नहीं था कि यह स्कूल, जो वो खोल रहे हैं और जो बाद में कॉलेज बना, वह एक दिन केंद्रीय विश्वविद्यालय भी बनेगा। प्रोफेसर हबीब ने कहा कि इतना जरूर है कि वह छात्रों को विज्ञान और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना चाहते थे और इसके लिए वह लगातार उस समय नई योजनाएं बना रहे थे। उन्होंने कहा कि सर सैयद स्कूल की स्थापना के समय एक-एक पैसे का संग्रह बहुत मेहनत से कर रहे थे।
ऐसे में यह मान लेना कि सोने चांदी जैसी बहुमूल्य धातुएं वह जमीन में गाढ़ देंगे, स्वीकारा नहीं जा सकता। सर सैयद अहमद द्वारा 20 अप्रैल 1889 को अपने निकटतम मित्र मौलवी जैनुलाब्दीन को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने कहा, ‘मैंने आपका नाम स्कॉलरशिप बजट के लिए 5रुपये प्रतिमाह देने वालों की सूची में लिख लिया है।’ सर सैयद इस तरह आर्थिक प्रबंधन कर रहे थे। उनके पत्रों में अक्सर इस बात का जिक्र आता है कि उन्होंने अपने सहयोगियों से आर्थिक रूप से सहयोग के लिए अपील की है।
विज्ञापन

प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि सर सैयद अहमद राजा राममोहन राय से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने एक जगह लिखा भी है कि वह जब करीब 12 वर्ष के रहे होंगे तो 1830 के आसपास राजा राममोहन राय के दिल्ली आने पर वह उनसे मिले थे। राजा राममोहन राय ने कोलकाता में एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज खोला था। सर सैयद ने इस टाइटल के आगे मोअम्डन जोड़ दिया और इस तरह मोअम्डन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज नाम रखा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें