दिल्ली-वाराणसी के अलावा वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बंगलूरू और बंगलूरू-चेन्नई कॉरिडोर भी परियोजनाओं में शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में इन कॉरिडोर के निर्माण पर 16 लाख करोड़ रुपए निवेश का अनुमान जताते हुए ऐसे हाईस्पीड रेलवे ट्रैक पर हाई स्पीड ट्रेनें 250 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंने की जानकारी दी।
डीपीआर का काम पूरा
बीते सात फरवरी को रेलवे बोर्ड ने एक बैठक के बाद एनएचएसआरसीएल को निर्देश जारी किए। इसमें कॉरिडोर के कार्यों में क्रियान्वयन में तेजी लाई जाने के साथ साथ दिल्ली से वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन के लिए डीपीआर अपडेट करने के लिए कहा है। साथ ही वाराणसी से सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण अभी होना है। बैठक में फैसला लिया कि जिन कॉरिडोरों का डीपीआर पहले से बना है, उनकी लागत, संशोधित लागत और परियोजना पूर्णता लागत को अपडेट किया जाएगा। इसके अलावा भूमि, डिजाइन, टेंडर से जुड़ी प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की सूची बनाकर कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स भी तैयार करने का आदेश दिया।
एक देश-एक मानक बनेगा
बुलेट ट्रेन के लिए देश में एक समान हाई-स्पीड रेल मानक बनाए जाएगें। इन कॉमन तकनीकी मानक तय करने की जिम्मेदारी भी एनएचएसआरसीएल को दी है। प्रत्येक परियोजना के लिए फील्ड में कोर टीम बनेगी और उनके मुख्यालय तय किए जाएंगे। तकनीकी रूप से प्रशिक्षित स्टाफ तैयार करने और तैनाती की योजना बनेगी। एनएचएसआरसीएल से हर हफ्ते रेलवे बोर्ड को प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए ताकि रेलवे मंत्रालय से समय पर मदद मिल सके।