बीते रविवार रात सोसायटी की बैठक में बिल्डर और निवासियों के दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। महुआखेड़ा थाने में इसका मुकदमा दर्ज हुआ। 31 मार्च और 1 अप्रैल को प्रदर्शन हुआ। महिलाओं ने डीआईजी से मिल कर आरोपियों को पकड़ने की मांग उठाई। 2 अप्रैल को भी प्रदर्शन हुआ। इसके बाद 3 अप्रैल को आम सभा की बैठक हुई। बैठक में सोसायटी को भंग कर दिया गया और दो महीनों में चुनाव कराने का निर्णय हुआ।
3 अप्रैल को ग्रीन पार्क अपार्टमेंट में ग्रीनपार्क रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी की आम सभा की बैठक में लिए गए निर्णय पर बिल्डर संजीव पाराशर ने सहमति व्यक्त की है। मामले की जांच के लिए एसएसपी का आभार प्रगट किया है।
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बिल्डर संजीव पाराशर ने ग्रीन पार्क अपार्टमेंट में शांति का श्रेय अलीगढ़ एसएसपी को दिया है। उन्होंने कहा कि लोग कह रहे थे कि संजीव पाराशर को गिरफ्तार करो, हम कह रहे थे जांच करो। इस पर 2 अप्रैल को एसपी सिटी ने तीन बिंदुओं पर जांच की। जिसमें कमरे की सीसीटीवी फुटेज, मीटिंग हॉल में बैठे लोगों के बयान और पक्ष-विपक्ष के लोगों की तहरीरों को शामिल किया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलेगा कि बैठक में कुर्सियां फेंकी गईं या धीरे से रखी गईं, संजीव पाराशर ने हमला किया या नहीं, पार्थ पाराशर ने सबसे पहले बचाव किया या कुछ और, बाहरी व्यक्ति से क्या आशय है।
संजीव पाराशर ने 3 अप्रैल को हुई आम सभा की बैठक के बारे में कहा कि तबियत खराब थी, इसलिए हॉस्पिटल में था। बैठक का आयोजन वैध था या अवैध, पर कुछ नहीं कहूंगा। बैठक में जो निर्णय लिया गया, उसके साथ हूं। सोसायटी में शांति रहनी चाहिए।
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यह है मामला
बीते रविवार रात सोसायटी की बैठक में बिल्डर और निवासियों के दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। महुआखेड़ा थाने में इसका मुकदमा दर्ज हुआ। 31 मार्च और 1 अप्रैल को प्रदर्शन हुआ। महिलाओं ने डीआईजी से मिल कर आरोपियों को पकड़ने की मांग उठाई। 2 अप्रैल को भी प्रदर्शन हुआ। इसके बाद 3 अप्रैल को आम सभा की बैठक हुई। बैठक में सोसायटी को भंग कर दिया गया और दो महीनों में चुनाव कराने का निर्णय हुआ। तय हुआ कि एक तीन सदस्यीय संचालन समिति बनाई जाए। जो सोसायटी का संचालन करेगी व दो माह में चुनाव कराएगी। इस समिति में हरेंद्र वार्ष्णेय, पुनीत वार्ष्णेय व डाॅ.अमित गुप्ता को चयनित किया गया।