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कोरोना काल में गैरजरूरी चीजों में कटौती कर किया बजट प्रबंधन

Wed, 01 Jul 2020 01:05 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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Amar ujala webinaar - फोटो : Amar Ujala
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 कोरोना महामारी ने घरों का बजट बिगाड़ दिया है। ऐसे में अमर उजाला ने मंगलवार को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत शहर की कामकाजी, गृहणी तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं के बीच वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार का मुख्य विषय था - ‘कोरोना काल में कैसे संभाला घर का बजट’ 
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   महिलाओं ने कहा कि घर का बजट कमाई पर निर्भर करता है, जैसी कमाई होती है वैसा ही खर्च होता है। लेकिन संकट के वक्त गैरजरूरी चीजों में कटौती कर प्रबंधन किया जा सकता है। साथ ही बच्चों को पनीर की जगह दाल खाने की आदत डलवाई, बाहर से मंगाने की बजाय घर पर पिज्जा बनाया। 


   इसके अलावा जो पैसा बचा, उसको जरूरतमंदों की मदद पर खर्च किया। दूसरों को भी प्रेरित किया। महिलाओं ने जरूरतमंद लोगों की मदद करने का आह्वान किया। साथ ही सरकार से भी मध्यमवर्गीय परिवारों की मदद करने की मांग की। आइए जानते हैं बजट प्रबंधन की कहानी, महिलाओं की जुबानी।  
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 लॉकडाउन में बच्चों को सिखाया कि पनीर की जगह दाल खाना सीख लो। हम ऐसा करेंगे तो हमारे हिस्से का भोजन किसी जरूरतमंदों को मिल जाएगा। सामूहिक रूप से बजट छोटा किया और लोगों की मदद की। यह इसीलिए जरूरी है कि आज भी कई लोगों की तनख्वाह नहीं मिल रही है। कोई आधे वेतन पर कार्य कर रहा है। एक दूसरे का सहयोग करेंगे तो कोरोना पर भी विजय प्राप्त कर लेंगे। पूनम सारस्वत, निर्देशिका दुर्गा सांस्कृतिक कला केंद्र



लॉकडाउन में बाहर के खर्चे    नाममात्र के रह गए थे। ऐसे में घर की स्थिति को देखकर बजट बनाया था। इस दौरान लोगों की मदद भी की। अन्य लोगों को भी अपने घर के बजट में
कुछ कटौती करके जरूरतमंदों की मदद करनी  चाहिए और बजट भी ऐसा बनाना है कि आगे जाकर कोई परेशानी न हो। रिचा वार्ष्णेय, शिक्षिका।  


सभी जानते हैं कि आज की बचत, कल की सुरक्षा है। कोरोना संक्रमण काल में चुनौती बढ़ गई है। वेतन आएगा या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बजट को बनाना चाहिए। अगर बचत को देखकर बजट बना लें तो आगे परेशानी नहीं आएगी। साथ ही अन्य जरूरतमंद लोगों का भी ख्याल रखें। पूजा सिंह, शिक्षिका।


मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए योजनाएं बनें 
अपने सभी प्रकार के खर्चों में जैसे फल, दूध, कपड़े, बिजली आदि में कटौती कर रहे हैं। बढ़ा हुआ बिजली का बिल भी अनावश्यक खर्चों में आ रहा है। किसी भी तरह घर का बजट संभाला  है। इसीलिए सरकार से गुजारिश है कि वह माध्यम वर्गीय परिवार के लिए योजना लेकर आए जिससे उनके यहां का आर्थिक संकट दूर हो।  दीपाली अरोरा, ब्यूटीशियन, साहिबा ब्यूटी पार्लर रेलवे रोड।  


बजट के साथ-साथ तनाव पर ध्यान जरूरी 
कोरोना में तनाव और आर्थिक संकट चल रहा है। हर व्यक्ति इस संकट से गुजर रहा है। ऐसे में संगीत के माध्यम से तनाव को दूर किया जा सकता है। वहीं, घर का बजट बनाना अपराजिताएं अच्छे से जानती हैं। जैसी पारिवारिक आय होती है, वैसे ही खर्चे होते हैं। इसीलिए बजट के साथ साथ तनाव पर ध्यान देना जरूरी है। डॉ. सीमा बंसल, एसोसिएट प्रोफेसर संगीत, टीआर कालेज। 

अगर चाह लें तो कुछ भी संभव है 
हमें अपनी सूची बनाकर चलना चाहिए। प्रारंभिक जरूरतों में से जो हटा सकते हैं, हटा दें। जहां पर अधिक रुपये खर्च हो रहे हैं। उन्हें कम भी किया जा सकता है। अगर घर का बजट कम नहीं हो रहा है तो परिजनों का सहयोग लेकर भी बजट बना सकते हैं। लॉकडाउन ने लोगों को हुनरमंद भी बनाया है। अगर चाहें तो सबकुछ संभव है। पूजा कुलश्रेष्ठ, मनोवैज्ञानिक परामर्शदात्री। 

खर्चों पर नियंत्रण से सही रहेगा बजट 
लॉकडाउन में हमारी जरूरतें सीमित हो गई थीं। कंपनी की जगह घर में ही पिज्जा बनाया गया। सालों बाद परिवार इकट्ठा हुआ। शादी के लिए ज्वेलरी, साड़ी जैसे खर्चे कम हो गए थे। जो भी खाया, आवश्यकता के अनुसार घर में ही बनाया था। ऐसे में बजट कम ही खर्च हुआ। खर्चों पर नियंत्रण रहा तो बजट निश्चित ही सही रहेगा। इंदू वार्ष्णेय, हेड एवं एसोसिएट प्रोफेसर, इकोनॉमिक्स विभाग डीएस कॉलेज।  
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