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अलीगढ़ः किसान संगठनों ने कहा, आंदोलन का बदला लेने वाला बजट

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शशिकांत। मीडिया प्रभारी, संयुक्त किसान मोर्चा - फोटो : CITY OFFICE
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केंद्र सरकार के आम बजट से किसान संगठन खासे नाराज हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने बजट को किसानों से आंदोलन का बदला लेने वाला बजट करार दिया है। अधिकतर किसान नेताओं का कहना है कि वह कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों समेत अन्य लाभकारी योजनाओं का बजट घटाने से नाराज हैं। इसके विरोध में दोबारा से आंदोलन करेंगे।
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वित्त मंत्री के बजट भाषण से स्पष्ट था कि किसान आंदोलन से हार से तिलमिलाई हुई सरकार किसानों से बदला लेने पर आमादा है। कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों का कुल बजट पिछले साल के 4.26 प्रतिशत से घटाकर इस वर्ष 3.84 प्रतिशत कर दिया गया है। ग्रामीण विकास का बजट पिछले साल 5.59 प्रतिशत से घटाकर इस वर्ष 5.23 प्रतिशत कर दिया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बजट पिछले साल 16000 करोड रुपये से घटाकर इस साल 15500 करोड रुपये कर दिया गया है। मनरेगा में पिछले साल 97.034 करोड रुपये खर्च हुआ था। लेकिन इस साल का बजट मात्र 72.034 करोड़ है।
शशिकांत, मीडिया प्रभारी किसान संयुक्त मोर्चा
किसान आम बजट को जीरो नंबर देता है। किसानों को फसल का दाम मिल सके, उसके लिए सरकार की पीएसएस और एमआईएस स्कीम में पिछले साल खर्च 3595 करोड़ रुपये हुआ। लेकिन सरकार ने इस मद को घटाकर इस साल 1500 करोड़ कर दिया। किसानों को एमएसपी दिलवाने के लिए अरुण जेटली द्वारा बनाई गई स्कीम आशा का बचत घर के अंतर्गत पिछले साल 400 करोड़ रुपये का प्रावधान इस साल घटाकर सिर्फ एक करोड़ रुपये कर दिया गया है। एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में सरकार का योगदान पिछले साल 900 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है। यह निंदनीय है।
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सूरजपाल उपाध्याय, जिला उपाध्यक्ष किसान सभा
सरकार कोऑपरेटिव को समर्थन देने की बात करती है, लेकिन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के लिए बजट पिछले साल के 700 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है। पराली जलाने से रोकने के लिए किसान को सहायता देने के लिए पिछले साल सात सौ करोड़ का बजट था जो इस साल घटाकर शून्य कर दिया गया है। बजट के तमाम प्रावधानों से लगता है। सरकार किसानों से बदले की भावना रखती है। बजट यह स्पष्ट करता मौजूदा पूरी तरह किसान विरोधी है। ऐसे में देश भर के किसानों के साथ विश्वासघाती सरकार के खिलाफ दोबारा आंदोलन की शुरूआत करने के सिवाय कोई दूसरा चारा नहीं बचता।
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सुरेशचंद्र गांधी, मंडल प्रभारी, क्रांतिकारी किसान यूनियन

सूरज पाल उपाध्याय। उपाध्यक्ष, किसान सभा- फोटो : CITY OFFICE

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