जिला पंचायत चुनाव को लेकर जारी काउंट-डाउन के तहत बसपा-सपा खेमों में टक्कर जारी है। एक तरफ बसपा समर्थन बचाने में जुटी हुई है और सपा समर्थन जुटाने की जुगत में लगी है। इसी कड़ी में देर रात तक दोनों खेमों में अपने-अपने तरीके से प्रयास जारी हैं।
एक तरफ देर रात तक सपा विधायक के रामघाट रोड स्थित आवास पर गाडिय़ों के काफिले के साथ भीड़ मौजूद थी और बसपा खेमे में भी अपने तरीके से उठापटक जारी रही। इधर, पुलिस स्तर से 38 जिला पंचायत सदस्यों को सुरक्षा देने के बाद देर रात तक सदस्य सुरक्षा लेने से कतराते रहे। यही वजह रही कि देर रात तक पुलिस यह सूची नहीं दे सकी कि कौन सदस्य पुलिस सुरक्षा में हैं।
शनिवार को एसएसपी व डीएम द्वारा जिला पंचायत सदस्यों को सुरक्षा संबंधी आदेश जारी किए जाने के बाद से पंचायत चुनाव से जुड़े लोगों में हलचल है। इस खबर पर तमाम ऐसे सदस्य सामने आए जो सुरक्षा लेने से कतराते रहे। किसी ने लिखित में तो किसी ने मौखिक रूप से यह कह दिया कि उन्हें सुरक्षा नहीं चाहिए।
वहीं पुलिस द्वारा 38 सदस्यों की जो सूची बनाई गई है, उसमें कई नाम ऐसे हैं, जिनको सुरक्षा दिया जाना खुद में राजनीतिक रसूख के दम पर हास्यासपद लग रहा है। इनमें कुछ नाम ऐसे हैं जो जिले में है ही नहीं। कुछ ऐसे नाम हैं जो खुलेआम बिना सुरक्षा घूम रहे हैं। इन लोगों से जब पूछा गया तो जवाब मिला कि हां, थाना स्तर से उनको सूचना दी गई। मगर हमने साफ इंकार कर दिया कि हमें इसकी जरूरत नहीं है।
इधर, तमाम जिला पंचायत सदस्य पत्र लेकर इधर-उधर घूमते नजर आए, जो सुरक्षा के नाम से ही कतरा रहे थे। उनका कहना था कि न उन्हें कोई बंधक बना रहा और न ही कोई धमकी दे रहा है। इतना ही नहीं वह तो इस चुनाव का बहिष्कार भी कर चुके हैं। सुरक्षा लेने से क्या फायदा होगा? यह कहते हुए उन्होंने सुरक्षा लेने से दो टूक मना कर दिया। आज जिलाधिकारी दफ्तर में वह अपने पत्र दाखिल करेंगे।
इधर, सियासी खेमों में समर्थन जुटाने व बचाने की जुगत तेजी से जारी है। एक तरफ जहां सपा खेमा खुद को कमजोर समझते हुए एड़ी से चोटी का जोर लगाए हुए है। स्थिति यह है कि गाडिय़ों के काफिले संग सियासी कद्दावर खुद को समर्थन जुटाने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। वहीं बसपा इस प्रयास में है कि कोई उनके समर्थन में टांग न मार दे।