अभी तक स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने वाले अतिथियों का स्वागत गुलदस्तों (बुके) से होता है। लेकिन अब किताब से होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने सभी आयोजनों में बुके कल्चर को खत्म कर दिया है। अलीगढ़ जनपद के सभी 2115 परिषदीय स्कूलों के लिए 11 नवंबर से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। खेल और दूसरी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वालों विद्यार्थियों को भी किताब ही पुरस्कार स्वरूप भेंट की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने घर घर प्रेरक कहानियों की किताबें पहुंचाने की मुहिम शुरू की है। विभाग का मानना है कि जब घरों पर किताबें पहुंचेंगी तो बच्चे इन्हें पढ़ेंगे भी। उनके भीतर कुछ अच्छी कहानियां पढ़ने की आदत पैदा होगी। इससे बच्चे मोबाइल पर कम और किताबों के साथ समय ज्यादा बिताएंगे। बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिले में 2115 विद्यालय हैं, जिनमें सवा दो लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं।
स्कूलों में छोटे बच्चों की जो प्रतियोगिताएं होंगी उनमें भी प्रतिभाग करने वाले बच्चों को पुरस्कार स्वरूप किताबें दी जाएंगी। साथ ही विद्यार्थियों को राजकीय जिला पुस्तकालयों में भी प्रवेश की अनुमति मिलेगी। हर छात्र को प्रति सप्ताह एक पुस्तक पुस्तकालय से भी दी जाएगी। जो पाठ्यक्रम से अलग कहानी, उपन्यास, जीवनी या प्रेरणादायक साहित्य की होगी। विद्यार्थियों को पढ़ी गई पुस्तकों का सारांश प्रार्थना सभा में सुनाना होगा।.
विद्यार्थी किए जाएंगे प्रोत्साहित
- मासिक परियोजना कार्य : विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट कार्य के लिए पुस्तकालय की पुस्तकों का संदर्भ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- पुस्तक चर्चा सत्र : विद्यार्थियों को अपनी पढ़ी गई पुस्तकों पर चर्चा करने और समीक्षा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।
- पुस्तक निर्माण : विद्यार्थियों को अपनी कहानियां लिखने और चित्रित करने के लिए प्रेरित किया जाए।
- कहानी का समय : कठपुतली, अभिनय नाटक आदि के माध्यम से कहानियों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाए।
- पुस्तक चिकित्सक : जो विद्यार्थी अधिक पढ़ते हैं, वह अपने साथियों को उनकी रुचि के अनुसार पुस्तकें सुझाएं।
- अन्य प्रतियोगिताएं : पुस्तक प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, वर्तनी प्रतियोगिताएं होंगी।