सीओ प्रथम के अनुसार पूछताछ व जांच में उजागर हुआ है कि आरोपी राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय किसी भी क्रिकेट, फुटबॉल आदि टूर्नामेंट में मैच पर टीम की हार जीत से लेकर खिलाड़ी के अगली चाल पर दाव लगाता है। उसे उसके ऊपर से रेट निर्धारित कर दिया जाता है। वह उसी रेट के अनुसार ग्राहकों से हार-जीत पर दाव लगवाता है। अगर ग्राहक जीता तो तय रेट के अनुसार उसे भुगतान होगा। हारने पर उसके द्वारा लगाई गई रकम डूब जाएगी। इसका आरोपी को कमीशन मिलता है।
शहर का बड़ा बुकी, हर दिन लगते लाखों के दाव
पुलिस पूछताछ में उसने बेशक मासिक रूप से 20 लाख रुपये के लेनदेन के साक्ष्य दिखाए हैं। मगर आंतरिक रूप से साक्ष्य मिला है कि वह एक-एक दिन में 10-10 लाख रुपये से ज्यादा के दाव लगवा रहा था। लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण वह वर्तमान में शहर का सबसे बड़ा बुकी बना हुआ था। उसके एक सीनियर का नाम तो नहीं आया। मगर मोबाइल नंबर के आधार पर उसके विषय में जानकारी मिली है, जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं छह-सात अन्य सहयोगियों के नाम भी मिले हैं। साथ में 70 से अधिक जो खेलने वालों के नंबर मिले हैं, उनके विषय में जानकारी जुटाई जा रही है।
सियासी सरपरस्ती में पनपा ये कारोबार
हालांकि पुलिस ने किसी तरह की सिफारिश मानने से से इन्कार कर दिया। मगर खबर मिली है कि अब तक विपिन यह सब सियासी सरपरस्ती में कर रहा था। उसे शहर के ही एक नेता का संरक्षण प्राप्त था। इसी क्रम में उसके पकड़ने जाने के बाद रात में कई भाजपा नेता भी सिफारिश में थाने में पहुंचे थे।