जिला अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस में मरीज के लेटने की सीट फटी हुई।
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दिल्ली में दौड़ती एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर फटने की घटना ने अलीगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत भी उजागर कर दी है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसी एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं, जो तय मानकों से दूर हैं और मरीजों की जान को जोखिम में डाल रही हैं।
शुक्रवार को जब शहर के अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस की पड़ताल की गई तो पाया कि जेएन मेडिकल कॉलेज, दीनदयाल अस्पताल, जिला अस्पताल और बड़े निजी अस्पतालों के आसपास बड़ी संख्या में ओमिनी वैन को एंबुलेंस के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन वाहनों में मरीज को लाने-ले जाने के अलावा जरूरी चिकित्सा सुविधाएं अक्सर नदारद रहती हैं।
इस बीच सबसे चिंताजनक स्थिति ऑक्सीजन व्यवस्था को लेकर है। कई एंबुलेंस संचालक अपने पास सिलिंडर रखने के बजाय मरीज के परिजनों या अस्पताल से ही इसकी व्यवस्था कराते हैं।
ऐसे में इमरजेंसी की स्थिति में समय और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इन एंबुलेंसों के पंजीकरण, फिटनेस और संचालन मानकों की निगरानी भी प्रभावी नहीं दिखती। आरटीओ दीपक शाह के अनुसार समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है और पिछले तीन माह में 19 एंबुलेंसों को मानक पूरे न करने पर बंद किया गया है।
अन्य के खिलाफ कार्रवाई जारी है। इसके बावजूद शहर में चल रही कई एंबुलेंस इन मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। ऐसे में सवाल यह है कि अगर दिल्ली जैसा हादसा यहां होता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा?