गरीबों को वितरित होने वाले कंबल कानपुर प्रयोगशाला की जांच में फेल हो गए हैं। इनकी लंबाई सरकारी मानकों पर खरी नहीं उतरी। प्रशासन अब संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जांच के चलते पहले ही इन कंबलों के वितरण पर रोक लगाई जा चुकी है। अब इनकी जगह दूसरी कंपनी के कंबलों का वितरण कराया जा रहा है।
हर साल सर्दियों में प्रशासन गरीब, मजलूम एवं बेसहारा लोगों में कंबलों का वितरण कराता है। इस बार भी तहसीलवार कंबल वितरण के लिए यूपीका कंपनी से अनुबंध किया गया था। कंपनी द्वारा कंबल सप्लाई के बाद जब डीएम के आदेश पर इनकी गुणवत्ता की जांच की गई तो यह कंबल संदेह के दायरे में आ गए। तब तक जिले भर में 15 हजार से अधिक कंबल बंट चुके थे। इसके बाद डीएम ने इन कंबलों के वितरण पर रोक लगाते हुए जांच के लिए कंबलों को कानपुर प्रयोगशाला में भेज दिया। वहां से आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक इनकी लंबाई 218 सेंटीमीटर पायी गई। जबकि सरकारी मानकों के अनुसार लंबाई 235 सेंटीमीटर होनी चाहिए थी।
दूसरी कंपनी के कंबलों पर अंगुलियां उठने पर जांच
यूपीका कंपनी के बाद प्रशासन ने दूसरी कंपनी के कंबलों को वितरण के लिए मंगाया था। लेकिन नुमाइश गोदाम में रखे इन कंबलों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आ गई। उत्तर प्रदेश भवन सन्निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष रघुराज सिंह ने इनकी गुणवत्ता की जांच कराने को कहा। इसके बाद पिछले दिनों उद्यम समागम कार्यक्रम में आए प्रदेश सरकार के एमएसएर्मई रेशम एवं खादी ग्रामोेद्योग राज्य मंत्री चौ.उदयभान सिंह द्वारा इन कंबलों का वितरण नहीं कराया गया और जांच के लिए भेज दिया गया। इनकी अभी जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।
घटिया गुणवत्ता के कंबल सप्लाई करने के मामले में यूपीका कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इनका वितरण रोक दिया गया है। लैब रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाएगी।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी