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भाजपा ने झटकीं चार सीटें, कांग्रेस-सपा का नहीं खुला खाता

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सारसौल स्थित एक गेस्ट हाउस में नगर निगम कार्यकारणी की बैठक को संबोधित करते नगर आयुक्त प्रेम रंजन - फोटो : CITY OFFICE
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नगर निगम की चौथी कार्यकारिणी के छह सदस्यों का निर्णय शनिवार को निर्वाचन से हुआ। स्थानीय होटल रॉयल रेजीडेंसी में मेयर मो फुरकान की अगुवाई में हुए कार्यकारिणी के अधिवेशन में पांच सदस्य वोटिंग से सीधे चुने गए। टाई हुए मतों के बाद एक सदस्य का चुनाव पर्ची डालकर हुआ। मुख्य मुकाबला भाजपा व बसपा में रहा।
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कांटे के संघर्ष व सांसद समेत अन्य पदेन सदस्यों के भी वोटिंग के लिए आने के बाद भाजपा एक बार फिर अपने चार सदस्यों को जिताने में सफल रही। बसपा के दो सदस्य चुने गए। सपा व कांग्रेस की झोली खाली रही। बतातें चले कि इससे पहले भी जिन पार्षदों का कार्यकाल खत्म हुआ था, उनमें 4 सदस्य भाजपा व दो बसपा के ही थे। इस बार भी भाजपा के 4 सदस्य चुने जाने के बाद उनका उपसभापति बनना तय हो गया है।
इन पार्षदों का कार्यकाल हुआ था समाप्त
- पुरानी कार्यकारिणी के पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन, मो शाकिर, डॉ शबाना असलम, सूरज कुमार, नीलेश उपाध्याय, अलका गुप्ता।
निर्वाचन के बाद चुने गए नए सदस्य
- नई कार्यकारिणी में भाजपा के विजय तोमर, मुकेश शर्मा, राजेन्द किशोर व हेमंत गुप्ता। बसपा के सद्दाम हुसैन व मुशर्रफ। बताते चलें कि पार्षद मुशर्रफ और सपा के शकील के बीच मुकाबला टाई होने के उपरांत पर्ची डाली गई, जिसमें मुशर्रफ हुसैन विजयी घोषित हुए।
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सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित
- प्रवर्तन अधिकारी कर्नल निशीथ सिंघल को रिलीज करने, कर्मचारियों के वेतन वृद्धि, कंप्यूटर ऑपरेटर के वेतन वृद्धि, पार्षदों के मानदेय बढ़ाए जाने व बैठने के लिए कक्ष उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मोहर लगी।
- चार अनुपूरक प्रस्तावों संपत्ति कर भुगतान पर वर्तमान वित्तीय वर्ष में दी गई छूट व आगामी वित्तीय वर्ष में दी जाने वाली छूट का प्रस्ताव, सामान्य आउटसोर्स चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर के वेतन वृद्धि पर पार्षदों ने लगाई सहमति की मोहर।
15 सदस्यों ने भरे नामांकन, तीन ने लिए नाम वापस
कार्यकारिणी के 6 सदस्यों के निर्वाचन के लिए 15 पार्षदों ने आवेदन किया। इनमें वार्ड 54 से मुशर्रफ हुसैन, वार्ड 66 सद्दाम हुसैन, वार्ड 51 मुकेश शर्मा, वार्ड 26 हेमंत गुप्ता, वार्ड 70 मो. शकील, वार्ड 8 राजेन्द्र किशोर, वार्ड 57 शाहिद मलिक, वार्ड 42 विजय तोमर, वार्ड 21 नरेंद्र वार्ष्णेय, वार्ड 58 नफीस शाहीन, वार्ड 55 हाफिज अब्बासी, वार्ड 38 हुमैरा, वार्ड 35 मो शाकिर, वार्ड 23 संतोष दरानी व वार्ड 65 अमीरुद्दीन ने नामांकन पत्र क्रय किया।
इसके बाद सभी पार्षदों ने अपना नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी अरुण भाटी के समक्ष जमा किया। जबकि 3 पार्षद अब्बासी, संतोष कुमार दरानी व नरेंद्र वार्ष्णेय ने नाम वापिस लिया। शेष 12 लोगों के बीच निर्वाचन प्रक्रिया शुरू हुई। शाम 6 बजे महापौर मोहम्मद फुरकान, आईआई प्रेम रंजन सिंह, अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त, निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार भाटी सहित नगर निगम अधिकारियों कर्मचारियों की मौजूदगी में मतगणना प्रारंभ हुई।
इन पदेन सदस्यों ने डाला वोट
- कार्यकारिणी निर्वाचन में पदेन सदस्य के रूप में अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम, शहर विधायक संजीव राजा, कोल विधायक अनिल पराशर, विधायक बरौली दलवीर सिंह, विधायक छर्रा रवेंद्र पाल सिंह, विधान परिषद सदस्य ठाकुर मानवेंद्र प्रताप सिंह व 70 नगर निगम पार्षदो ने वोट डाले।
सांसद हाथरस राजवीर दिलेर नहीं आये तो देरी से आने पर इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी का वोट नहीं डल सका।
ये रही निर्वाचन प्रक्रिया
अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने बताया निर्वाचन कार्यक्रम अनुसार दोपहर 12.30 से एक बजे तक मतदाता सूची का प्रकाशन आपत्ति व निस्तारण, 1 बजे से 1.30 बजे तक नामांकन पत्र का वितरण किया गया। 1.30 से 2 बजे तक नामांकन पत्रों को भरकर निर्वाचन अधिकारी को प्राप्त कराना, 2 बजे से 2.30 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच, 2.30 बजे से 3.00 बजे तक नाम वापसी की समयावधि व वापसी की उपरांत अंतिम रूप से निर्वाचन हेतु प्रत्याशियों की संख्या की घोषणा, 3 बजे निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ करने की घोषणा निर्वाचन अधिकारी द्वारा, 3.30 बजे से 4.45 तक मतदान, 4.45 से मतपत्रों की गणना प्रक्रिया समाप्त होने के बाद निर्धारित कार्यक्रम अनुसार कार्यकारिणी का निर्वाचन शुरू कराया गया।
कल लिखा गया था सद्दाम पर मुकदमा
इस बार कमेटी में निर्वाचित हुए पार्षद सद्दाम हुसैन बेहद विवादित रहे हैं। पूर्व में उन पर सांसद सतीश गौतम के बेटे पर हमले का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके अलावा उज्जैन मंदिर को लेकर विवादित टिप्पणी मामले में उन्हें जेल तक जाना पड़ा। अब बुधवार को उन पर सिविल लाइंस में एएमयू के बिल्डिंग विभाग में जाकर धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर इस बात की भाजपा खेमे में खूब चर्चा रही कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी सद्दाम पर अपने पक्ष में यह लॉबिंग कैसे कर ली।
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