सुरेंद्र दिलेर के बाबा स्व. किशन लाल दिलेर ने सियासत में लंबी पारी खेली। जनसंघ के समय वह चुनावी मैदान में उतरे। कोल विधानसभा से वे चार बार विधायक और हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद बने। किशनलाल दिलेर पहली बार वर्ष 1967 में कोल विधानसभा से जनसंघ के विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1985, 1991 और 1993 में भी कोल सीट से भाजपा के विधायक बने। वर्ष 1996, 1998, 1999 और 2004 में वह लगातार हाथरस लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। हाथरस में भाजपा से लगातार चार बार सांसद रहने का रिकॉर्ड सिर्फ किशनलाल दिलेर के ही नाम है। आज तक इस रिकार्ड को कोई दल नहीं तोड़ सका है।
पिता दो बार लगातार विधायक और सांसद बने
सुरेंद्र के पिता राजवीर दिलेर ने वर्ष 2017 में इगलास विधानसभा चुनाव से सियासत की शुरुआत की थी। वह भी सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी थे। इगलास विधानसभा (सुरक्षित) सीट से योगी सरकार में दो बार विधायक रहे। दूसरे कार्यकाल में उन्हें हाथरस लोकसभा से प्रत्याशी बनाए जाने पर इगलास विधानसभा सीट छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद वह हाथरस से सांसद चुने गए। सुरेंद्र की बहन मंजू दिलेर भी केंद्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य रह चुकी हैं।
कशमकश के बाद मिली थी टिकट
खैर विधानसभा सीट से भाजपा से दावेदारों की सूची काफी लंबी थी। रालोद से गठबंधन होने से कई बार यह सीट रालोद के खाते में भी जाने की चर्चा रही। भाजपा और रालोद के कई नेता टिकट के लिए कतार में थे, मगर सबको पीछे छोड़ते हुए सुरेंद्र दिलेर ने टिकट हासिल की।
उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर को पिता राजवीर दिलेर के निधन की सहानुभूति भी मिली। राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है। राजवीर दिलेर को भाजपा ने 2019 में हाथरस लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। वह बड़े अंतर से चुनाव जीते। इसके वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला। पार्टी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के दौरान ही हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। चर्चा है कि इस सहानुभूति के रूप में सुरेंद्र दिलेर को खैर विधानसभा सीट से टिकट मिला।
सांसद-विधायक देने वाली गभाना तहसील फिर बनी वीआईपी
अलीगढ़ जिले में राजनीति का प्रमुख केंद्र रहने वाली गभाना तहसील एक बार फिर से वीआईपी बन गई है। हाथरस सांसद अनूप प्रधान के अलावा खैर विधानसभा के उपचुनाव में जीते सुरेंद्र दिलेर भी गभाना तहसील के गांव दौरऊ-चांदपुर के मूल निवासी हैं। संयोग से दोनों ही भाजपा से ही चुने गए हैं। केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की सरकार है। गभाना तहसील पहले भी राजनीति में प्रदेश स्तर पर नुमाइंदगी कर चुकी है।
इससे पहले पंडित मोहनलाल गौतम वीरपुरा, सुरेंद्र सिंह चौहान ऊमरी, ठा. दलवीर सिंह वीरपुरा के माजरा हीरापुर भी गभाना के ही रहने वाले थे। ये तीनों प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। वीरपुरा की शीला गौतम अलीगढ़ से चार बार सांसद बनीं। दौरऊ के किशनलाल दिलेर व उनके बेटे राजवीर दिलेर हाथरस से सांसद रह चुके हैं। हाथरस के सांसद अनूप प्रधान भी गभाना तहसील क्षेत्र के गांव रकराना- पिसावा के रहने वाले हैं। वह दो बार खैर विधानसभा से विधायक व योगी सरकार में राजस्व मंत्री रहे हैं।