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खैर उपचुनाव: लगातार तीसरी बार खिला कमल, साइकिल सुस्त, 19वें विधायक बने सुरेंद्र दिलेर

Sun, 24 Nov 2024 10:48 AM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

बचपन से राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े सुरेंद्र दिलेर ने तीसरी पीढ़ी से विधायक बन कर नाम रोशन कर दिया है। 31 वर्ष की उम्र में सुरेंद्र पहली बार चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। खास बात ये है कि इससे पहले वह भाजपा में किसी पद या प्रकोष्ठ में सक्रिय नहीं रहे।
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जीत के बाद फूल-मालाओं से लदे सुरेंद्र दिलेर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के खैर में लगातार तीसरी बार कमल खिला है। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र दिलेर ने सपा प्रत्याशी चारू कैन को 38393 वोटों से हराया है। दूसरे स्थान पर रहीं चारू कैन को 61788 जबकि तीसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी डॉ. पहल सिंह को 13365 वोट मिले हैं।

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खैर विधानसभा सीट के विधायक अनूप प्रधान के हाथरस के सांसद बन जाने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर उपचुनाव हुआ। 20 नवंबर को हुए मतदान के बाद जो स्थिति सामने आई थी उसके अनुसार भाजपा और सपा का कड़ा मुकाबला दिखाई दिया। 23 नवंबर को 31 राउंड तक चली मतगणना में भाजपा शुरू से अंत तक बढ़त बनाए रही। आजाद समाज पार्टी कांशीराम के प्रत्याशी नितिन चौटेल को 8269 और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के प्रत्याशी भूपेंद्र कुमार धनगर को 1143 वोट प्राप्त हुए। 760 वोट नोटा में डाले गए हैं।

दादा और पिता के बाद अब सुरेंद्र बने सियासत के राजकुमार
बचपन से राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े सुरेंद्र दिलेर ने तीसरी पीढ़ी से विधायक बन कर नाम रोशन कर दिया है। 31 वर्ष की उम्र में सुरेंद्र पहली बार चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। खास बात ये है कि इससे पहले वह भाजपा में किसी पद या प्रकोष्ठ में सक्रिय नहीं रहे। जब वह खैर विधानसभा से मैदान में उतरे तो हार-जीत को लेकर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे थे। गुटबंदी के बीच पार्टी ने टिकट देकर उन पर जो विश्वास जताया, उस पर वह खरे उतरे। उन्होंने अपने बाबा किशनलाल दिलेर और पिता राजवीर दिलेर की सियासत की विरासत को बखूबी संभाला। मूलरूप से बराैली विधानसभा क्षेत्र के गांव दाैरऊ के रहने वाले सुरेंद्र ने अपने सहज व्यवहार से मतदाताओं के दिलों में जगह बनाई है।

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बाबा चार बार विधायक और चार बार सांसद रहे

सुरेंद्र दिलेर के बाबा स्व. किशन लाल दिलेर ने सियासत में लंबी पारी खेली। जनसंघ के समय वह चुनावी मैदान में उतरे। कोल विधानसभा से वे चार बार विधायक और हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद बने। किशनलाल दिलेर पहली बार वर्ष 1967 में कोल विधानसभा से जनसंघ के विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1985, 1991 और 1993 में भी कोल सीट से भाजपा के विधायक बने। वर्ष 1996, 1998, 1999 और 2004 में वह लगातार हाथरस लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। हाथरस में भाजपा से लगातार चार बार सांसद रहने का रिकॉर्ड सिर्फ किशनलाल दिलेर के ही नाम है। आज तक इस रिकार्ड को कोई दल नहीं तोड़ सका है।

पिता दो बार लगातार विधायक और सांसद बने
सुरेंद्र के पिता राजवीर दिलेर ने वर्ष 2017 में इगलास विधानसभा चुनाव से सियासत की शुरुआत की थी। वह भी सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी थे। इगलास विधानसभा (सुरक्षित) सीट से योगी सरकार में दो बार विधायक रहे। दूसरे कार्यकाल में उन्हें हाथरस लोकसभा से प्रत्याशी बनाए जाने पर इगलास विधानसभा सीट छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद वह हाथरस से सांसद चुने गए। सुरेंद्र की बहन मंजू दिलेर भी केंद्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य रह चुकी हैं।

कशमकश के बाद मिली थी टिकट
खैर विधानसभा सीट से भाजपा से दावेदारों की सूची काफी लंबी थी। रालोद से गठबंधन होने से कई बार यह सीट रालोद के खाते में भी जाने की चर्चा रही। भाजपा और रालोद के कई नेता टिकट के लिए कतार में थे, मगर सबको पीछे छोड़ते हुए सुरेंद्र दिलेर ने टिकट हासिल की।

सहानुभूति का भी मिला लाभ

उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर को पिता राजवीर दिलेर के निधन की सहानुभूति भी मिली। राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है। राजवीर दिलेर को भाजपा ने 2019 में हाथरस लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। वह बड़े अंतर से चुनाव जीते। इसके वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला। पार्टी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के दौरान ही हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। चर्चा है कि इस सहानुभूति के रूप में सुरेंद्र दिलेर को खैर विधानसभा सीट से टिकट मिला।

सांसद-विधायक देने वाली गभाना तहसील फिर बनी वीआईपी
अलीगढ़ जिले में राजनीति का प्रमुख केंद्र रहने वाली गभाना तहसील एक बार फिर से वीआईपी बन गई है। हाथरस सांसद अनूप प्रधान के अलावा खैर विधानसभा के उपचुनाव में जीते सुरेंद्र दिलेर भी गभाना तहसील के गांव दौरऊ-चांदपुर के मूल निवासी हैं। संयोग से दोनों ही भाजपा से ही चुने गए हैं। केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की सरकार है। गभाना तहसील पहले भी राजनीति में प्रदेश स्तर पर नुमाइंदगी कर चुकी है।

इससे पहले पंडित मोहनलाल गौतम वीरपुरा, सुरेंद्र सिंह चौहान ऊमरी, ठा. दलवीर सिंह वीरपुरा के माजरा हीरापुर भी गभाना के ही रहने वाले थे। ये तीनों प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। वीरपुरा की शीला गौतम अलीगढ़ से चार बार सांसद बनीं। दौरऊ के किशनलाल दिलेर व उनके बेटे राजवीर दिलेर हाथरस से सांसद रह चुके हैं। हाथरस के सांसद अनूप प्रधान भी गभाना तहसील क्षेत्र के गांव रकराना- पिसावा के रहने वाले हैं। वह दो बार खैर विधानसभा से विधायक व योगी सरकार में राजस्व मंत्री रहे हैं।

राउंडवार गणना

पहला राउंड
भाजपा 3447
सपा 1738
बसपा : 448
दूसरा राउंड
भाजपा : 3779
सपा : 2208
बसपा : 1405
तीसरा राउंड
भाजपा : 2766
सपा : 1916
बसपा : 306
चौथा राउंड
भाजपा : 4372
सपा : 1619
बसपा : 437
पांचवां राउंड
भाजपा : 3969
सपा : 1652
बसपा : 868
छठवां राउंड
भाजपा : 3181
सपा : 1715
बसपा : 629
सातवां राउंड
भाजपा : 3549
सपा : 1762
बसपा :455
आठवां राउंड
भाजपा :2787
सपा : 2203
बसपा : 458
नाैवां राउंड
भाजपा : 3368
सपा : 1889
बसपा : 507
दसवां राउंड
भाजपा : 3696
सपा : 1028
बसपा : 585

11वां राउंड
भाजपा : 3140
सपा : 2884
बसपा : 235
12 वां राउंड
भाजपा : 2636
सपा : 2224
बसपा :237
13वां राउंड
भाजपा : 3231
सपा : 1371
बसपा : 378
14वां राउंड
भाजपा : 2535
सपा : 2547
बसपा : 304
15वां राउंड
भाजपा : 2915
सपा : 2661
बसपा : 406

16वां राउंड
भाजपा : 3192
सपा :3730
बसपा : 408
17वां राउंड
भाजपा : 4057
सपा : 1013
बसपा : 283
18वां राउंड
भाजपा : 4395
सपा :1726
बसपा : 477
19वां राउंड
भाजपा : 4724
सपा : 1917
बसपा : 119
20वां राउंड
भाजपा : 3018
सपा : 1919
बसपा : 550
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21 वां राउंड
भाजपा : 3394
सपा : 2045
बसपा : 602
22वां राउंड
भाजपा : 3117
सपा : 1635
बसपा : 245
23वां राउंड
भाजपा : 2409
सपा : 3483
बसपा : 145
24वां राउंड
भाजपा : 2872
सपा : 2404
बसपा : 353
25वां राउंड
भाजपा : 3539
सपा : 1548
बसपा : 479
26 वां राउंड
भाजपा : 2983
सपा : 1334
बसपा : 283
27वां राउंड
भाजपा : 3006
सपा : 1686
बसपा : 292
28वां राउंड
भाजपा : 2756
सपा : 2301
बसपा : 525
29वां राउंड
भाजपा : 2392
सपा : 3259
बसपा : 371
30 वां राउंड
भाजपा : 2833
सपा : 1430
बसपा : 418
31वां राउंड
भाजपा : 1898
सपा : 752
बसपा : 82
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