नोटबंदी के बाद पूरे देश में तेजी से बिगड़े हालात में भाजपा कहां पर खड़ी है..? पब्लिक नोटबंदी के फैसले से कितनी परेशान है..? यूपी के विधानसभा चुनाव 2017 में अब नोटबंदी के बाद पार्टी की क्या स्थिति बन रही है..? भाजपा में अंदर खाने इन सवालों पर मंथन शुरू हो गया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय पाठक ने गुरुवार को अलीगढ़ में संगठन के पदाधिकारियों, चुनाव प्रभारियों के साथ पंचवटी फार्म हाउस बोनोर पर बैठक की। इस बैठक में उक्त सवालों का फीडबैक लिया गया।
अमर उजाला से फोन पर हुई विशेष बातचीत में प्रदेश महामंत्री ने माना कि नोटबंदी से जनता परेशान है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका बहुत ज्यादा और व्यापक असर हुआ। बैंक अधिकारी भेदभाव कर अपने बड़े ग्राहकों की नकदी की समस्या दूर कर रहे हैं, बाकी जनता लाइन में लग कर परेशान है। उन्होेंने कहा कि इसकी रिपोर्ट संगठन पार्टी के माध्यम से वित्त मंत्रालय को भेजेगा, ताकि जनसमस्या को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के सीएम अखिलेश यादव आधी अधूरी योजनाओं का लोकार्पण कर श्रेय बटोरने में लगे हैं जबकि अधिकांश योजनाओं में केंद्र सरकार का बड़ा आर्थिक सहयोग शामिल है। उदाहरण लखनऊ मेट्रो के रूप में पब्लिक के सामने है जो केंद्र के सहयोग से बन रही है।
बैठक में अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज की विधानसभाओं के प्रभारियों और एवं चुनाव सहायक बुलाए गए थे। जिसमें बूथ समितियों के गठन और बूथ स्तर के काम की समीक्षा भी हुई।
बैठक में सुनील पांडेय लोकसभा पालक, नितेश तोमर पश्चिमी उत्तर प्रदेश चुनाव सहायक, ऋषिपाल सिंह प्रदेश कार्यकारिणी, डॉ. राजीव अग्रवाल बृज क्षेत्र मीडिया संपर्क प्रमुख, मीना कुमारी पूर्व जिलाध्यक्ष, विक्रम सिंह हिंडोल विधानसभा प्रभारी इगलास, डॉ. उमेश कुमारी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, आलोक वार्ष्णेय शहर विस प्रभारी आदि मौजूद रहे।
भाजपा टिकट के दावेदार टेंशन में
अलीगढ़। बीती 8 नवंबर की रात से पूरे देश में एक हजार और पांच सौ रुपये का पुराना नोट बंद कर दिया गया है। मोदी सरकार के इस फैसले पर पहले पांच दिन तक लोगों ने लंबी लाइनों की तकलीफ सह ली लेकिन उसके बाद भी जब नकदी संकट दूर नहीं हुआ तो पब्लिक का धैर्य जवाब दे गया। जनता की ये परेशानी अब भाजपा के टिकट के दावेदाराें को भी बड़ा टेंशन दे रही हैं। टिकट के दावेदार पब्लिक के मूड को भांप रहे हैं। हालत ये है कि भाजपा नेता जनता के सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं।