थाना परिसर में बुधवार दोपहर सत्ताधारी विधायक राजकुमार सहयोगी के पहुंचने के बाद क्या हुआ? इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क और साक्ष्य हैं। मगर इस घटना के बाद संगठन ने हमले का शिकार हुए एबीवीपी कार्यकर्ता के खिलाफ क्रास मुकदमे का जो मुद्दा बनाया। वह ढाल की तरह काम कर गया। इस ढाल ने ही एसओ और विधायक के बीच थाने में झगड़े की घटना पर सरकार को रुष्ट कर दिया। जब यह बात खुद गोरखपुर में मौजूद मुख्यमंत्री तक पहुंची तो आनन-फानन उन्होंने डीजीपी को जवाबदेह अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए और आईजी जोन से बृहस्पतिवार तक पूरे मामले में आख्या तलब की है। ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। अब आईजी जोन की आख्या तय करेगी कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार था। फिलहाल भाजपाई खेमा कार्रवाई के बाद संतुष्ट हो गया है। वहीं बात न सुने जाने से पुलिस निराश दिखाई दे रही है।
इस घटना की वजह से बना मुद्दा
वाकया 2 अगस्त की शाम करीब 5 बजे का है। कस्बा गोंडा के ही रहने वाले एबीवीपी के पूर्व जिला संयोजक रोहित वार्ष्णेय अपने भाई ललित संग जिम जा रहे थे। वह जैसे ही विपक्षी तस्लीम के घर के सामने से निकले तो तस्लीम ने उन्हें देखते ही यह टीका टिप्पणी की कि बहुत नेता बनता है। इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद के बीच आरोप है कि तस्लीम उसके भाई निजाम, मंगला, नूरुद्दीन व एक अन्य यूनुस ने मिलकर दोनों को लाठी-डंडों से पीटा। इस मारपीट में दोनों भाई गंभीर रूप से जख्मी हुए, जिसमें से रोहित अभी जिला अस्पताल में भरती है। घटना के संबंध में उसी दिन पुलिस ने ललित की तहरीर पर तस्लीम आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और तस्लीम को बाद में गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया।
अब आरोप है कि तस्लीम के पिता बनवारी उर्फ बन्नो खां की तहरीर पर अगले दिन रोहित, ललित व उनके साथी केके आदि खिलाफ एक राय हमलावर होकर घर में घुसकर मारपीट करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। यह खबर जब रोहित तक पहुंची तो संगठन के पदाधिकारियों व विधायक आदि को बताया गया। जिसका विरोध शुरू हुआ और एसओ से मुकदमे पर ऐतराज जताया गया। बात यह सामने आई कि दूसरे पक्ष का मुकदमा एसपी देहात के मौखिक आदेश पर दर्ज किया गया है। फिर भी संगठन के लोग इस मुकदमे का विरोध करते हुए खत्म करने की बात पुलिस से कह रहे थे। कई बार खुद विधायक ने एसओ से फोन पर बात की।
थाने की घटना में यह एक दूसरे के आरोप
जानकारी के अनुसार सांसद सतीश गौतम के पैतृक गांव में रहने वाली उनकी एक चाची का निधन हो गया था, जिसमें संवेदना व्यक्त करने पार्टी के तमाम लोग पहुंचे थे। वहीं यह विषय चर्चाओं में आया तो तय हुआ कि विधायक खुद थाने जाकर एसओ से चर्चा करेंगे। पीछे-पीछे खैर विधायक भी चल दिए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो विधायक जैसे ही थाने में गाड़ी से उतरे तो उन्होंने देखा कि एसओ एक तरफ खड़े थे, उन्होंने विधायक को कुर्सी ऑफर करते हुए बैठने के लिए कहा, जबकि मंदिर व चबूतरे पर बत्तन सिंह नाम का चौकीदार झाड़ू लगा रहा था।
खुद बत्तन सिंह के अनुसार आते ही विधायक ने उन्हें गाली दी। जिस पर एसओ ने चौकीदार की उम्र का हवाला देकर ऐतराज जताया तो पहले विधायक ने ही एसओ से हाथापाई शुरू की। इस बात की तस्दीक वहां मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी महिला गीता देवी ने भी की। कहा कि पहले विधायक ने ही हाथापाई शुरू की। उस समय एसओ अकेले थे। बाद में अन्य स्टाफ दौड़कर आया उसने बीच बचाव किया। वहीं विधायक व उनके समर्थकों का आरोप है कि बातचीत में एसओ व उसके साथ मौजूद दो दरोगा विनय व देवेंद्र सिंह ने एक साथ हाथापाई शुरू की।
थाने से लेकर सर्किट हाउस तक भाजपाइयों ने बनाया मुद्दा
इस सूचना पर सबसे पहले विधायक अनूप प्रधान, ठा.दलवीर सिंह, फिर सांसद सतीश गौतम बाद में एसपी देहात व एसपी क्राइम पहुंचे। यहां बातचीत में विधायक दलवीर सिंह ने प्रकरण समझने के बाद यही बात एसपी देहात के सामने उठाई कि आखिर क्रास में मुकदमा किस मंशा से लिखा गया। हालांकि एसपी देहात की दलील थी कि वह खत्म हो जाएगा। मगर विधायक ने कहा कि खत्म तो हम करा लेंगे। विधायक ने तुरंत मुख्यमंत्री के निजी सचिव को प्रकरण बताया। वे उस समय गोरखपुर में थे। बाद में सांसद ने यह सवाल उछाला कि एक हथियार तस्कर अपराधी का मुकदमा लिखा गया तो पुलिस की मंशा क्या थी। इसके बाद बाहर हंगामा कर रहे समर्थकों व बाजार बंद किए बैठे दुकानदारों को समझाकर शांत किया। बाजार खुलवाया और नेता अपने साथ विधायक राजकुमार सहयोगी को लेकर जिला मुख्यालय आ गए।
सर्किट हाउस में मंत्रणा के बाद डीएम आवास किया कूच
गोंडा से लौटे इन नेताओं के साथ-साथ सूचना पर सर्किट हाउस सांसद एटा राजीवर सिंह राजू भैय्या, हाथरस सांसद राजवीर दिलेर विधायक संजीव राजा, अनिल पाराशर, रविंद्र पाल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह, महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्तव, सुबोध स्वीटी, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह आदि तमाम कार्यकर्ता व नेता पहुंच गए। यहां से बैठकर शासन में मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी तक से वार्ता हुई। पूरा प्रकरण बताने के बाद यह लोग एकत्रित होकर डीएम चंद्रभूषण सिंह के आवास पहुंचे। जहां एसएसपी मुनिराज जी भी आ गए। देर रात करीब 9 बजे तक वार्ता चली। इसी बीच शासन से कार्रवाई का संदेश मिला और सभी वहां से खुशी खुशी लौट आए।
-गोंडा थाना प्रभारी व विधायक जी के मध्य हुए प्रकरण में एसएसपी की मौजूदगी में भाजपा संगठन के नेताओं के साथ बैठक हुई, जिसमें उन्होंने एक लिखित शिकायती पत्र दिया है। उसकी एसएसपी स्तर से जांच कराई जा रही है। वहीं शासन ने एसपी देहात को हटाने व एसओ को निलंबित करने का आदेश दिया है। मामले में आईजी स्तर से बृहस्पतिवार तक जांच आख्या तलब की गई है।-चंद्रभूषण सिंह, डीएम
-इस मामले में शासन स्तर से गोंडा एसओ को निलंबित कर दिया गया है। वहीं एसपी देहात को हटा दिया गया है। बाकी दोनों पक्षों के आरोपों की जांच के बाद आगे जो तय होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।-मुनिराज जी, एसएसपी