खैर रोड स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भ्रूण के लिंग परीक्षण की सूचना पर छापामार कार्यवाही करने आयी फरीदाबाद की टीम के विरोध में सेंटर पर भाजपा नेता पहुंच गए और कार्यवाही को बाधित कर दिया।
इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद थी लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कोई ठोस कार्रवाई संभव नहीं हो सकी। हताश होकर स्वास्थ्य विभाग की टीम को लौटना पड़ा।
हरियाणा और दिल्ली आदि क्षेत्र में अलीगढ़ की छवि कोख में ही बेटियों की कत्लगाह के रूप में विकसित हो रही हैं। यही कारण है कि वहां पर सख्ती होने के बाद भ्रूण के लिंग परीक्षण के लिए लोग अलीगढ़ आ रहे हैं। इस बात की जानकारी फरीदाबाद के स्वास्थ्य विभाग को मिली।
गुरुवार को फरीदाबाद के स्वास्थ्य विभाग की टीम अलीगढ़ आयी। यहां पर प्रशासन की ओर से एसीएम द्वितीय रेनू सिंह और एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा को फरीदाबाद की टीम के साथ किया गया। सभी लोग खैर रोड स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंचे। टीम ने अपने साथ लाई महिला को आठ हजार रुपये देकर भेजा।
महिला ने सेंटर पर संपर्क किया और वह उसका अल्ट्रासाउंड करने को तैयार हो गए। वहां सेंटर पर तैनात एक युवक को 8 हजार रुपये दे दिए। टीम के पहुंचने की भनक किसी तरह सेंटर संचालक को लग गई। उसने वहां भाजपा के माननीयों को बुला लिया। भाजपा नेता अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक के खुलकर समर्थन में उतर आए।
हालांकि छापा मारने गई टीम का दावा है कि युवक के पास से वह आठ हजार रुपये मिले, जो महिला ने उसे दिए थे। इसके अलावा महिला से रेफरल स्लिप भी नहीं मांगी गई। (नियम है कि डाक्टर के रेफर करने पर ही अल्ट्रासाउंड संचालक इमेजिंग कर सकता है)। साथ ही रिकार्ड अधूरा पाया गया। जबरदस्त राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते छापामार कार्यवाही रोक कर टीम को वापस लौटना पड़ा।
‘खैर रोड पर फरीदाबाद की टीम स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ छापा मारने पहुंची, लेकिन यहां पर भाजपा के नेता पहुंच गए। वह खुलकर अल्ट्रासाउंड संचालक के समर्थन में उतर आए। इसके बाद हालात ऐसे बने जिससे टीम को वापस लौटना पड़ा। जबकि सेंटर पर युवक के पास से आठ हजार रुपये मिले जो महिला ने दिए थे। रेफरल स्लिप नहीं मिली और रिकार्ड भी अधूरा था’ - डॉ. पीके शर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
‘हरियाणा सरकार कन्या भ्रूण हत्या या लिंग परीक्षण करने वालों को पकड़वाने पर पुरस्कार देती है। संभवत: मेरा मानना है कि इसके बाद वहां की कुछ टीमें यह लाभ लेने के लिए एक संगठित तरीके से नेटवर्क बना कर अल्ट्रासाउंड संचालकों के यहां पर छापा मारती हैं और उसके बाद सौदेबाजी करती हैं।
यह संभव नहीं है कि सभी जगह शत प्रतिशत नियम सही हों। कहीं न कहीं कोई कमी रहती है। आज खैर रोड पर भी यही हो रहा था। यहां पर भीड़ लगी देखी तो रुका। लोगों ने बताया कि फरीदाबाद की टीम यहां पर छापा मार रही है। वहां कुछ नहीं मिला और इनकी सौदेबाजी नहीं हो पाई।’ - संजीव राजा, विधायक