अलीगढ़ के राजनीतिक इतिहास में शनिवार 29 जुलाई 2017 का दिन हमेशा के लिए याद रखा जाएगा। जब पूर्व कबीना मंत्री एवं प्रदेश में बसपा के कद्दावर नेता ठा. जयवीर सिंह ने एमएलसी पद से अचानक त्याग पत्र दे दिया। उनके त्याग पत्र देने के कुछ ही घंटों में लखनऊ से दिल्ली और अलीगढ़ तक ये खबर आग की तरह फैल गई। सोशल मीडिया से लेकर हर नुक्कड़ और चौराहों पर यही चर्चा होती रही। बेहद जोरदार चर्चा इस बात की भी है कि ठा. जयवीर सिंह रविवार तक आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हो जाएंगे।
लखनऊ के सूत्रों के अनुसार इसक ी घोषणा रविवार को हो सकती है। गौर हो कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन दिन के लखनऊ प्रवास पर हैं और संभवत: उनके सामने ही इसका एलान होगा। शनिवार को अमित शाह की व्यस्तता के कारण ये घोषणा नहीं हो पाई। इधर, ठा. जयवीर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमो मायावती पर चुनाव टिकटों को लेकर पैसों का लेन देन का आरोप लगाने से बसपाइयों में जबरदस्त आक्रोश है।
ठा. जयवीर सिंह के भाजपा में जाने की अपुष्ट खबरों के आते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। एक दूसरे को बधाई दी जा रही है। ठा. जयवीर सिंह के जीटी रोड बन्ना देवी थाना स्थित कार्यालय पर भाजपा का झंडा फहर गया है, जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। गौर हो कि गुजरे 25 वर्ष से जयवीर सिंह बसपा की सक्रिय राजनीति में हैं। सिकंदराराऊ से पूर्व विधायक सुरेश प्रताप गांधी के साथ सक्रिय राजनीति में पदार्पण करने वाले जयवीर सिंह ने बाद में पूर्व सीएम कल्याण सिंह का दामन थाम लिया।
जब कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़ी तो जयवीर सिंह बसपा में आ गए। यहां जिलाध्यक्ष से लेकर कबीना मंत्री, एमएलसी तक रहे। वह वर्ष 2002 और 2007 में बरौली विधानसभा से बसपा के विधायक बने। पहली बार में ही कबीना मंत्री बने और वन विभाग मिला। इस दौरान 2004 में वह लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गये। इसके बाद वह दूसरे कार्यकाल में आरईएस मंत्री रहे। उनकी पत्नी राजकुमारी बसपा से वर्ष 2009 में सांसद बनीं। इसके बाद 2014 में उनका बेटा अरविंद सांसद का चुनाव लड़ा और हार गया। शनिवार सुबह तक एमएलसी रहे जयवीर का कार्यकाल मई 2018 में पूरा हो रहा था। वर्तमान में उनके भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू जिला पंचायत अध्यक्ष हैं जो पूर्व में जवां के ब्लाक प्रमुख रह चुके हैं।
अलीगढ़ में ठा. जयवीर सिंह की पहचान एक विकास पुरुष के रूप में है। उन्होंने अलीगढ़ के चहुंमुखी विकास के लिए हर संभव प्रयास किया है। वह क्षेत्र की जनता की समस्याओं के निवारण के लिए जितना संघर्ष और निष्ठा के साथ प्रयास करते हैं वह मेरे लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
-सौरभ सिक्ससंस, युवा व्यापारी नेता
आज की बदलती हुई परिस्थितियों पर मुझे कुछ नहीं कहना है। रही जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू को लेकर तो जो काम शुरू हुआ है उसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं है।
-चौ. सुधीर सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष
बसपा छोड़ने वाले वो लोग हैं, जो सत्ता के बिना नहीं रह सकते हैं, क्योंकि धन को बचाने के लिए सत्ता का साथ जरूरी है। ये लोग पैसे के दम पर पार्टियों में आते हैं और चले जाते हैं। जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी। विपक्ष के लिए बिजेंद्र सिंह अकेला ही काफी है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सांसद बनेगा। कांग्रेस ही इकलौती पार्टी है जो सबको जवाब देती रही है और आगे भी देगी।
-चौ. बिजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
बसपा के बारे में क्या कहूं..? सपा के कुछ लोग भी भाजपा में जाने की तैयारी में हैं। अभी और भी रास्ते खुले हैं। नोटबंदी, मीटबंदी, किसानों की आत्महत्या, जीएसटी आदि के चलते जनता भाजपा के खिलाफ है। ऐसे में भाजपा चुनाव में जाना नहीं चाहती है। सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आदि को विधान परिषद में भेजने के लिए ये सब कुछ किया जा रहा है। भाजपा तोड़फोड़ की राजनीति कर रही है।
-अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष
बसपा ने जयवीर सिंह को जिलाध्यक्ष बनाया। इसके बाद वह दो बार विधायक और फिर एमएलसी बने। उनकी पत्नी सांसद बनीं। बेटा अरविंद भी लोकसभा का चुनाव लड़ा। बसपा ने उनको फर्श से अर्श तक सफर तय कराया, लेकिन अब वो उसी पार्टी को छोड़ कर चले गए। ये बहुत गलत है। किसी भी नेता को ऐसा नहीं करना चाहिए, लेकिन उनके जाने से बसपा कमजोर नहीं होगी।
- अशोक सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
नैतिक ता और मूल्यों की राजनीति का तेजी से पतन हो रहा है। निजी हित में राजनीति हो रही है। हमें अपने बुजुर्गों से कुछ सीखने की जरूरत है जो मुश्किल से मुश्किल समय में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करते थे। भाजपा की तोड़फोड़ की राजनीति बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी।
-विवेक बंसल, कांग्रेस प्रवक्ता एवं राजस्थान प्रभारी
जयवीर के जाने से बसपा में बढ़ी बेचैनी
बसपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के पार्टी छोड़ने की घोषणा करने के बाद स्थानीय बसपाई हतप्रभ रह गए। जिले में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा रहे जयवीर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी अब डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई है। इसी के चलते बसपा सुप्रीमो के निर्देश पर जोन इंचार्ज सत्यप्रकाश कर्दम मथुरा से यहां आए और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया। वैसे पार्टी छोड़कर जयवीर सिंह ने बसपा के सामने यहां काफी परेशानी खड़ी कर दी है और पार्टी का एक मजबूत स्तंभ ढह गया है।
जिले में बसपा की राजनीति में जयवीर सिंह सबसे बड़ा चेहरा थे। सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत पार्टी क्षत्रिय वोटों को पाने के लिए जयवीर सिंह का इस्तेमाल करती और जयवीर सिंह भी बसपा के परंपरागत वोटों और सजातीय वोटों के सहारे दो बार एमएलए का चुनाव जीते। पार्टी ने दोनों बार उन्हें अपनी सरकार में केबिनेट मंत्री बनाया। उनकी पत्नी राजकुमारी चौहान भी बसपा के टिकट पर सांसद चुनी र्गइं। उनके बेटे अरविंद कुमार सिंह को भी पार्टी ने अलीगढ़ लोकसभा सीट से टिकट दिया, लेकिन वह चुनाव हार गए। पिछले दो बार से जयवीर सिंह बरौली क्षेत्र से बसपा के टिकट से चुनाव लड़े थे और दोेनों बार हारे थे, लेकिन इसके बाद भी पार्टी में उनकी इतनी धाक थी कि चुनाव हारने के बाद भी बसपा ने उन्हें एमएलसी बनाया और विधान परिषद में पहुंचाया। बसपा में संगठन से लेकर सरकार तक में जयवीर सिंह की ही तूती बोलती थी। सूत्रोें की मानें तो जयवीर सिंह की सहमति से ही जिले में पार्टी प्रत्याशियों की लिस्ट तय होती थी। अब शनिवार को जब जयवीर सिंह ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी तो यहां के पार्टी के नेता सन्न रह गए। उनके पार्टी छोड़ने की जानकारी बसपा के आला नेतृत्व को भी मिल गई और आननफानन में पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई। आलाकमान के निर्देश पर पार्टी के जोन इंचार्ज सत्यप्रकाश कर्दम मथुरा से यहां आए।
उन्होंने स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की और फिर मीडिया से भी यह नेता रूबरू हुए। पार्टी नेता हालांकि यही कहते रहे कि जयवीर सिंह के पार्टी छोड़ने से किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि पार्टी और मजबूत होगी, लेकिन अंदरखाने पार्टी में जयवीर सिंह के पार्टी छोड़ने पर हलचल मची हुई है और पार्टी इस स्थिति से उबरने के प्रयास कर रही है।