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पुलिस के खौफ से खेतों में रात बिता रहे ग्रामीण

Mon, 04 Jan 2016 02:15 AM IST
अलीगढ़/हरदुआगंज।
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अलीगढ़/हरदुआगंज। बिटिया के गांव में अब लोगों के दिलो-दिमाग में पुलिस का खौफ है। काफी पुरुष भीषण सर्दी में घरों की बजाय अपनी रात खेतों में बिता रहे हैं। कई लोग घरों में ताला डालकर बाहर चले गए हैं। कोई वाहन यदि रात के समय गुजरता है तो ग्रामीणों को यही डर सताता है कि कहीं पुलिस दबिश देने तो नहीं आ गई। निकट के कई गांवों में पुलिस ने कुछ लोगोें की इस मामले में टोह भी ली है। पुलिस की इस कार्रवाई पर लोगोें में आक्रोश भी पनप रहा है। पहले जहां घटना का खुलासा न होने पर पुलिस ग्रामीणोें के निशाने पर आई थी, अब पुलिस के खिलाफ यह मुद्दा गरमा सकता है।
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बिटिया के  साथ गैंगरेप और हत्या के बाद जब पुलिस देरी से पहुंची तोे आक्रोशित लोगोें ने पुलिस पर हमला कर दिया था। मामला चूंकि गरम था, इसलिए उस समय पुलिस खामोश रही। उसके बाद पुलिस ने वारदात का खुलासा किया और फिर नया पैंतरा चला। पुलिस ने इस मामले में पुलिस पार्टी पर हमला करने की रिपोर्ट लगभग 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर ली। पुलिस की इस कार्रवाई से गांव में खलबली मच गई और ग्रामीण खौफजदां हो गए।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद काफी ग्रामीण घर से गायब हो गए तो क ाफी ग्रामीण पुलिस के खौफ से घरों की जगह खेतों में छिपकर रात बिता रहे हैं। घरों में महिलाएं व बच्चे ही मौजूद हैं। हर ग्रामीण को यह डर सता रहा है कि कहीं पुलिस उसे इस मुकदमे में नामजद न कर ले।
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स्थिति यह है कि पिछले दो दिन से रात्रि में गांव के आसपास जब कोई वाहन गुजरता है तो ग्रामीणों को यह यही डर सताता है कि कहीं पुलिस की टीमें दबिश देने तो नहीं आ गई। यही नहीं ग्रामीण अपने-अपने माध्यमों से यह पता करने में भी जुटे हैं कि आखिर किसका नाम पुलिस रिपोर्ट में नामजद कर रही है। पुलिस पर मारपीट का कोई वीडियो है या नहीं। रिपोर्ट किन धाराओं में दर्ज है। इसमें कितने दिन जेल में रहना होगा।

गांव के पुरुषोें के घरों से गायब रहने के कारण घरों का काम-काज भी प्रभावित हो रहा है। महिलाएं और बच्चों को भी पुलिस का डर सता रहा है और वह बेहद परेशान हैं। इधर, पुलिस की इस कार्रवाई से ग्रामीणोेें में गुस्सा भी पनपना शुरू हो गया है। कुछ ग्रामीणोें का कहना था है कि एक तो पुलिस घटनास्थल पर देरी से पहुंची और उसके बाद अब मुकदमा और दर्ज कर लिया है। डीएम ने तो इस मुकदमे को वापस लेने का वादा किया था। कुछ ग्रामीण इसे लेकर फिर उच्चाधिकारियोें से मिलने की योजना बना रहे हैं। 
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