ये हैं विदेशी मेहमान
यहां पर ग्रेलक ग्रूज (हंस), बार हेडेड गूज (राजहंस), ब्रह्मणी सैल डक (चकवा- चकवी), रेड क्रस्टेड पोचार्ड, टफ टफ पोचार्ड, मलार्ड, मलार्ड टील, कांमन टील, मार्बल्ड टील, पेन्टिल, सौबलर, रेड पोचार्ड, टफ टफ पोचार्ड, कांमन पोचार्ड, लाल सर, कांमन कूट, पेलीकन, कार्मोस्ट सैलडक, व्हाइट पेलीकन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड गल, गैडबाल, स्पून बिल डक, गार्गिनी समेत डेढ सौ से अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां आते हैं। फिलहाल लगभग पंद्रह से बीस प्रकार की प्रजातियों के परिंदे यहां मौजूद हैं।
ये हैं स्थानीय परिंदे
भारतीय नदी टर्न (स्टर्ना ऑरेंटिया) और सारस क्रेन (ग्रस एंटीगोन), पुल पुल मूरहेन, पनकौआ, जलकौआ, ब्लैक आइविश, व्हाइट आईविश, बड़ा बगुला, स्पॉट बिल, ओपन बिल, जल मुर्गा, डार्टर, ग्रे हीरोन, पेटेंड स्ट्रोक, ग्रेट कोरमोरेंट, पर्पल हीरोन, कॉम्ब डक, व्हाइट आईबिज, ब्लैक हैडेड आईबिज, ओपन बिल स्ट्रोक, स्पॉट बिल्ड डक, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, कॉमन मूरहेन, लिटिल कोरमोरेंट, व्लाइट आईबिज।
तीन दुर्लभ प्रजातियों के कछुओं का भी घर
यह झील बेहद प्राचीन है, जहां कछुओं की तीन दुर्लभ प्रजातियां भी रहती हैं। इसमें क्रमश: काला तालाब कछुआ (जियोक्लेमिस हैमिल्टन), भारतीय फ्लैप-शेल्ड कछुआ (लिसेमिस पंक्टाटा) और गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ (निल्सोनिया गैंगेटिका) शामिल है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि परिंदों के साथ ही इन कछुओं का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। झील के आसपास पर्णपाती जंगल हैं। खुले जल निकाय और जंगल के बीच संक्रमण ने इस पारिस्थितिक क्षेत्र का निर्माण किया है, जिससे पौधों और जानवरों की प्रजातियों की एक विशाल विविधता सामने आई है।