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बिजली कटौती: 321 करोड़ खर्च के बाद भी गर्मी में ब्रेकडाउन, हो रहे फॉल्ट-ट्रिपिंग, उपभोक्तओं की बढ़ी परेशानी

Thu, 23 Apr 2026 09:55 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

साल 2024 से 2025 तक अलीगढ़ जिले में 394 फीडरों पर काम किया गया। इन पर करीब 321 करोड़ रुपये से ज्यादा बजट खर्च हुआ। इसके बावजूद आए दिन फीडर से संबंधित परेशानियां सामने आ रही हैं।
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मानिक चौक में जली बिजली के तार - फोटो : जागरूक पाठक
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विस्तार
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42 डिग्री तापमान में अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। यह स्थिति तब है जब हर साल सर्दियों में मरम्मत (मेंटेनेंस) कार्य होता है, लेकिन इसका असर गर्मियों में कहीं नजर नहीं आ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 से 2025 तक अलीगढ़ जिले में 394 फीडरों पर काम किया गया। इन पर करीब 321 करोड़ रुपये से ज्यादा बजट खर्च हुआ। इसके बावजूद आए दिन फीडर से संबंधित परेशानियां सामने आ रही हैं।

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विभाग के मुताबिक, बीते दो साल में लगभग 100.29 किमी नई केबल बिछाई गईं। 578.16 किमी एलटी लाइन को एबी केबल में बदलते हुए 2169.1 किमी जर्जर केबल भी बदल दी गईं। इनके अलावा, 508 किमी एलटी लाइन को एरियल बंच केबल से मजबूत किया गया। साथ ही 149.049 किमी लाइन फीडर बांटकर सुधारी गई है। 400 फीडरों का बिजली वितरण (घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक) अलग-अलग किया गया। इतने बड़े काम और खर्च के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था में सुधार न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

शहर व देहात क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में सुधार के कार्य जारी हैं। निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए पिछले दो साल में 394 फीडरों पर करीब 321 करोड़ से अधिक के काम कराए जा चुके हैं। तापमान बढ़ने से ब्रेकडाउन, शटडाउन और लोड बढ़ने से फाॅल्ट होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं।-अरविंद नायक, मुख्य अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम।

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गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
  • करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आपूर्ति क्यों नहीं सुधर रही?
  • जर्जर केबल और ट्रांसफॉर्मर बदलने के बाद भी फॉल्ट और ट्रिपिंग क्यों हो रही है?
  • अगर काम हुआ है तो ट्रांसफॉर्मर और लाइनें बार-बार क्यों जवाब दे रही हैं?
  • ट्रांसफॉर्मरों में तेल की कमी जैसी समस्याएं अभी भी क्यों सामने आ रही हैं?

दावों के विपरीत है जमीनी हकीकत 
जिले के कई इलाकों में दिन में कई बार बिजली ट्रिप कर रही है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में तो घंटों की कटौती आम बात हो गई है। ट्रांसफॉर्मर फुंकने, लो-वोल्टेज और तेल की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जबकि विभाग इन पर सुधार का दावा करता है। लोगों का कहना 
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