रेलवे द्वारा गठित जांच कमेटी ने 11 मई के बाद दूसरे दिन 12 मई को भी गाजियाबाद से अलीगढ़ तक के 120 किलोमीटर लंबे रास्ते की सेक्शन वाइज गहनता से जांच की गई। यह भी जांच की गई कि ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दाैड़ती रही और रास्ते में पड़ने वाले दादरी, मारीपत, बोडाकी, दनकाैर, खुर्जा, चोला, सोमना, कुलवा, महरावल स्टेशन समेत 14 स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों ने ड्यूटी में क्या लापरवाही बरती है। यह भी साफ हुआ है कि गाड़ी नई दिल्ली से थ्रू आ रही थी।
गाजियाबाद स्टेशन के पास 200 मीटर पूर्वी यार्ड में रेलवे फाउंडेशन को तोड़ने का काम चल रहा है। यहां काम कर रहे मजदूर लापरवाही से ड्रिल मशीन को रेलवे ट्रैक पर ही छोड़ गए थे। चोला स्टेशन व दादरी स्टेशन पर गेटों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के अनुसार मशीन डीजल टैंक में घुसी हुई थी। जबकि ट्रेन दादरी, मारीपत, लेबर गेट संख्या 148, 149 से धीमी गति से गुजरी थी। दादरी व मारीपत में तैनात प्वांइट्समैन व गेटमैन ने पाॅवर कार डीजल टैंक में फंसी ड्रिल मशीन को नहीं देखा।