आम बजट में ऐसे दो प्रावधान सामने आए हैं, जिससे जिले के लगभग 50 हजार लोगों को कागजी कामकाज और एडवांस आयकर अदा करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। अभी तक लागू नियम के अनुसार म्यूचुअल फंड, शेयर और मार्केट लिंक्ड बीमा योजनाओं में संबंधित कंपनी द्वारा लाभांश (डिविडेंड) घोषित होते ही निवेशक को इस लाभांश पर बनने वाले आयकर का एडवांस भुगतान करना होता था, भले ही लाभांश का भुगतान कई महीने बाद मिले।
अब नए प्रावधान के अनुसार, लाभांश निवेशक के खाते में आने के बाद ही उस पर आयकर देना होगा। जिले में शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और मार्केट लिंक्ड बीमा योजनाओं में लाभांश लेने वालों की अनुमानित संख्या तकरीबन 40 हजार के आसपास है, जिनको ये बड़ी राहत मिली है। इसी तरह से 75 वर्षीय बुजुर्गाें को अब सालाना आयकर और रिटर्न दोनों के झंझट से मुक्त किया गया है, बशर्ते उनकी आय निर्धारित दायरे में हो। जिले में ऐसे लगभग 10 हजार बुजुर्ग हैं, जिनको इसका लाभ मिलेगा। इस तरह बजट के दो प्रावधानों से ही जिले के 50 हजार लोगों को राहत मिली है। जिसका पूरा लेखा-जोखा मार्च 2022 के बाद आंकड़ों सहित सामने होगा।
बुजुर्ग ऐसे समझें सरकार की छूट
1- सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ बुजुर्ग नागरिक) को सालाना पांच लाख रुपये तक की आय में कोई कर नहीं देना होता है।
2- सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से ऊपर बुजुर्ग नागरिक) को सालाना तीन लाख रुपये तक की आय में कोई कर नहीं देना होता है।
3- आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए अगर 75 वर्षीय बुजुर्ग सालाना तीन लाख रुपये की निर्धारित आय से अधिक कमाते हैं तो उनको आयकर अदा कर रिटर्न भी जमा करना होगा।
4- 75 वर्षीय जिन बुजुर्गों की सालाना आय निर्धारित तीन लाख रुपये तक है। उनके लिए अब आयकर रिटर्न जमा करना ऐच्छिक है, क्योंकि इस आय पर कोई कर नहीं है।
5- अभी तक प्रावधान था कि वरिष्ठ नागरिक को तीन लाख एक रुपये की सालाना आय पर हर हाल में रिटर्न फाइल करना होता था।
6- अब नए प्रावधान में ऐसे 75 वर्षीय बुजुर्ग, जिनकी आय तीन लाख से अधिक है। परंतु न तो कोई टैक्स बना और न ही रिफंड बना, तो उन बुजुर्गों को आयकर और रिटर्न जमा करने से राहत दी गई है।
डिविडेंड लेने वालों को अब एडवांस टैक्स नहीं देना होगा। 75 वर्षीय बुजुर्गों को नियमानुसार, आयकर और रिटर्न जमा करने के झंझट से मुक्त किया गया है। ये अच्छी पहल है। इसके अलावा व्यक्तिगत व मध्यमवर्गीय परिवारों को बजट से सीधे तौर पर कोई लाभ नहीं मिला है। बड़े कारपोरेट घरानों के लिए सरकार ने दीर्घकालिक योजनाएं बनाई हैं, जिससे सरकार अपने स्वामित्व की जमीनों, खनन क्षेत्र और दूसरे संसाधनों का अधिक से अधिक दोहन कर राजस्व प्राप्त करेगी। इससे बड़ी कंपनियों को काम मिलेगा, रोजगार पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेहतर योजनाएं बनाई हैं, बशर्ते धरातल पर जनता को इसका लाभ मिल सके। कुल मिला कर ये बजट मिला-जुला कहा जा सकता है, जिससे भविष्य में बाजार में नगदी का प्रवाह बनेगा।
- सीए अवन कुमार सिंह, अध्यक्ष आयकर अधिवक्ता एसोसिएशन एवं वाइस चेयरमैन बाम्बे मर्केंटाइल बैंक।