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नामांकन में एक ही बहस.. चौधरी किसका हुक्का थामेंगे, भाजपा सन्नी दयोल के रोड शो की तैयारी में

Tue, 26 Mar 2019 12:55 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन में पहुंचे भूपिंदर सिंह हुड्डा - फोटो : अमर उजाला
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जाटलैंड में नामांकन के दिन ही कांग्रेस प्रत्याशी के साथ हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की एंट्री से ही चौधरियों को लेकर महारथियों में जोर आजमाइश होने लगी है। हो भी क्यों न..। इस बार के चुनाव में अब तक सामने आए प्रमुख प्रत्याशियों में तीन जाट समुदाय से ही हैं। जिसमें कांग्रेस से चौ. बिजेंद्र सिंह, गठबंधन से अजीत बालियान और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के दीपक चौधरी जाट हैं। 

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ऐसे में खुद भाजपा भी जाटों के बीच मजबूत पकड़ रखती है। भाजपा ने जाट समुदाय को रिझाने के लिए सिने स्टार सन्नी दयोल का रोड शो प्लान किया है। वहीं, मथुरा से चुनाव लड़ रहीं भाजपा उम्मीदवार हेमा मालिनी को भी बुलाने की जुगत लगाई गई है। भाजपा के स्थानीय जाट नेता नत्थी सिंह, मीना कुमारी, पूर्व जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह को भी लगाया गया है। 

कांग्रेस प्रत्याशी चौ. बिजेंद्र सिंह ने नामांकन के दिन हरियाणा के पूर्व सीएम एवं जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पलवल से कांग्रेस विधायक जाट नेता करन दलाल को खड़ा किया। खुद विजेंद्र सिंह के जुलूस में टप्पल से अलीगढ़ तक के जाट नेता शामिल हुए। मकसद एक ही था जाटों को संदेश दिया जा सके। 
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इधर, बसपा सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी एवं जाट नेता अजीत बालियान ने भाकियू के जाट नेता अनिल तलान, टप्पल के विजय पाल सिंह जाट समेत अन्य जाट नेताओं को जनसभा में उतारा। उन्होंने अपने पूरे संबोधन में जाट समुदाय को उसकी काबिलियत याद दिलाई। 

गौर हो कि प्रगतिशील समाजवादी लोहिया पार्टी से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जाट नेता तेजवीर सिंह गुड्डू के पुत्र एवं वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य दीपक चौधरी भी मैदान में आ गए हैं। दीपक के चुनाव मैदान में आने से चौधरियों का हुक्का चारों ओर तेजी से घूम तो गया है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि चौधरी खुद किसका हुक्का थामेंगे..?

चौ. चरण सिंह के जमाने से है चौधरियों का बोलबाला
पूर्व पीएम एवं किसान नेता चौ. चरण सिंह के जमाने से ही अलीगढ़ जाट राजनीति के लिए जाना जाता रहा है। उस वक्त इगलास को मिनी छिपरौली कहा जाता था। खैर और इगलास हमेशा उनकी कर्म स्थली बना रहा। कालांतर में उनकी बेटी ज्ञानवती खैर से विधायक रहीं। इगलास से उनके सबसे बेहद करीबी राजेंद्र सिंह विधायक रहे। इन्हीं राजेंद्र सिंह को चौ. चरण सिंह ने अपनी विरासत में लोकदल सौंप दिया था। जिनके बेटे सुनील सिंह वर्तमान में इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उधर, चरण सिंह के बेटे चौ. अजीत सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल बना लिया, जो इस चुनाव में बसपा और सपा के गठबंधन में शामिल है। 

बहरहाल, चौधरी चरण सिंह के जमाने से ही अलीगढ़ लोकसभा सीट पर जाटों का खासा प्रभुत्व रहा। कोई भी उम्मीदवार उनके समर्थन के बिना संसद नहीं पहुंचा। आजादी के बाद से 1962 तक कांग्रेस के स्वर्णिम काल में जाटों ने कांग्रेस का हाथ थामे रखा। इसके बाद चौधरी युग का आगाज हुआ तो वर्ष 1962, 1967, 1971, 1977, 1980 और 1989 में जनता पार्टी के उम्मीदवार यहां से लोकसभा पहुंचे। वर्ष 1991, 1996, 1998 और 1999 में भाजपा से शीला गौतम संसद पहुंचीं। उनको भी जाटों का भरपूर साथ मिला। वर्ष 2004 में कांग्रेस के जाट नेता बिजेंद्र सिंह ने बाजी मारी। वर्ष 2009 में राजकुमारी चौहान, 2014 में सतीश गौतम चुनाव जीते। अब 2019 की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। 
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1-वर्ष 1962 में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के बुद्धप्रिय मौर्य जीते।
2-वर्ष 1967 में भारतीय क्रांति दल के शिवकुमार शास्त्री जीते।
3-वर्ष 1971 में भारतीय क्रांति दल के शिवकुमार शास्त्री जीते। 
4-वर्ष 1977 में जनता पार्टी के नवाब सिंह चौहान जीते। 
5-वर्ष 1980 में जनता पार्टी से इंदिरा कुमारी जीतीं। 
6-वर्ष 1989 में जनता पार्टी से सतपाल मलिक जीते।

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